उरण में पानी का संकट गहराया, रानसई धरने का स्तर 114.6 फुट, नवंबर से कटौती के आसार
रानसई धरने का जलस्तर लगातार गिर रहा है। एमआईडीसी विभाग ने कहा है कि बारिश नहीं हुई तो नवंबर से उरण तालुका में पानी कटौती हो सकती है।
उरण तालुका को पानी देने वाले रानसई धरने का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। लौटती बारिश ने इस बार दगा दिया, इसलिए धरने में पानी कम होता जा रहा है। आज धरने का जलस्तर 114.6 फुट पर आ गया है।
यह धरना उरण नगर परिषद, तालुका की 21 ग्रामपंचायतों, एनएडी, ओएनजीसी और कई औद्योगिक प्रकल्पों को पानी देता है। एमआईडीसी विभाग की तरफ से कहा गया है कि आने वाले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो नवंबर महीने से उरण तालुका में पानी कटौती लागू होने की संभावना है।
पिछले साल तालुका में अच्छी बारिश हुई थी, इसलिए 11 दिसंबर के बाद पानी कटौती का एलान किया गया था। इस बार बारिश कम रही, तो कटौती की नौबत करीब एक महीना पहले ही आ सकती है। पानी के बंटवारे का इंतजाम करते वक्त प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी। नागरिकों से भी पानी सोच-समझकर खर्च करने की अपील किए जाने की संभावना है।
तालुका की बढ़ती आबादी, औद्योगिक प्रकल्प और ग्रामपंचायतों की जलापूर्ति का जिम्मा रानसई धरने पर है। इसलिए धरने का स्तर गिरा तो असर घरों में पानी के इस्तेमाल पर भी पड़ सकता है और उद्योगों पर भी।
पिछले साल बारिश का मौसम जल्दी शुरू हुआ था और लौटती बारिश भी देर तक चली थी। तब रानसई धरना पूरे तीन बार ओवरफ्लो हुआ था और उसमें भरपूर पानी जमा हो गया था। इस बार मानसून में उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई, इसलिए धरना क्षेत्र में लौटती बारिश का इंतजार अब भी जारी है।
पिछले साल अक्टूबर में धरने का जलस्तर 116.6 फुट तक था। इस साल यह 114.6 फुट पर आ गया है और इसके और घटने की आशंका है। धरने के पाणलोट क्षेत्र में अगले कुछ दिन बारिश नहीं हुई तो मौजूद पानी पर बड़ा दबाव पड़ेगा। ऐसे में नवंबर से ही पानी सप्लाई में कटौती करने की नौबत आ सकती है।
लौटती बारिश के लंबा खिंचने से धरने के साथ-साथ तालुका के कुएं, तालाब, बंधारे और दूसरे जलस्रोतों पर भी बोझ बढ़ रहा है। गर्मी बढ़ने से पानी का भाप बनकर उड़ना तेज हो गया है और मौजूद पानी तेजी से घट सकता है। गांवों में पीने का पानी, खेती और जानवरों के लिए पानी का सवाल गंभीर हो सकता है।
किसान भी लौटती बारिश की राह देख रहे हैं। धान की फसल कटाई से पहले की अहम स्थिति में है और कई जगह बालियां आ चुकी हैं। किसानों को डर है कि पूरी बारिश न होने से दाने भरने का काम अटक सकता है। जमीन में नमी कम रही तो दानों का बढ़ना रुक सकता है और पैदावार घट सकती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसीलिए किसानों की नजर अब आसमान पर टिकी है।
नागरिक और किसान मांग कर रहे हैं कि संभावित पानी की किल्लत को देखते हुए प्रशासन अभी से जलापूर्ति का नियोजन करे। गांव-गांव में पानी के स्टॉक का जायजा लेकर दूसरे जलस्रोतों का इंतजाम किया जाए और पानी बंटवारे का टाइमटेबल तय हो, ऐसी अपेक्षा जताई जा रही है। धरना क्षेत्र में आने वाले दिनों में बारिश हुई तो हालात कुछ सुधर सकते हैं, लेकिन बारिश और खिंची तो नवंबर से उरण तालुका में पानी कटौती की संभावना और मजबूत हो जाएगी।