फ्रांस के प्रदर्शनों में लग्जरी दुकानें लुटीं, 38 करोड़ रुपये का माल चोरी
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
फ्रांस के सरकार विरोधी प्रदर्शनों में पेरिस, मार्सेल और बोर्डो की लग्जरी दुकानें लूटी गईं और माल सड़कों पर बिक रहा है।
फ्रांस में सरकार के खिलाफ चल रहे आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया है। यूरोप के सबसे शांत और आगे बढ़े देशों में गिने जाने वाले फ्रांस में इन दिनों सामाजिक और राजनीतिक अशांति का माहौल है। आंदोलन की आंच पूरे देश में फैली है। आंदोलन के नाम पर समाजकंटकों और नकाबपोश गुटों ने बड़े शहरों की अति-आलीशान (Luxury Brands) दुकानों को निशाना बनाया है।
पेरिस, मार्सेल और बोर्डो जैसे शहरों में हुई तोड़फोड़ में लाखों यूरो का डिजाइनर माल लूटा गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चोरी का यह माल अब सड़कों पर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खुलेआम बहुत सस्ते में बिक रहा है।
17 अक्टूबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान ऊंचे दर्जे की रिटेल दुकानों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया गया। मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, सिर्फ इसी एक दिन की हिंसा में करीब 4.25 दशलक्ष यूरो (लगभग 38 करोड़ रुपये) का आलीशान माल चोरी हुआ। लूटे गए माल में कपड़े या आम चीजें नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे महंगे ब्रांड्स के डिजाइनर हैंडबैग, आलीशान घड़ियां, महंगे परफ्यूम और कॉस्मेटिक्स शामिल हैं। फ्रांस के बड़े पर्यटन और कारोबारी केंद्रों पर हुए इन हमलों से ग्लोबल रिटेल सेक्टर को बड़ा झटका लगा है।
स्थानीय प्रशासन की दी जानकारी के मुताबिक, मार्सेल शहर में महंगी घड़ियों के मशहूर 'रोलेक्स' (Rolex) शोरूम में तोड़फोड़ की गई और करीब 3 दशलक्ष यूरो का नुकसान हुआ। वहीं बोर्डो शहर में जगप्रसिद्ध 'लुई व्हिटॉन' (Louis Vuitton) की दुकान से अंदाजन 1.25 दशलक्ष यूरो का माल उठा लिया गया गया। इसके अलावा सेलीन (Celine), हर्मेस (Hermès) और डिओर (Dior) जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स पर भी इस हिंसा की सीधी मार पड़ी है।
मास्क पहने और चेहरा ढके उपद्रवियों की टोलियों ने दुकानों के कांच तोड़े और कुछ ही मिनटों में पूरा शोरूम खाली कर दिया। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। वीडियो में लोग हाथों में महंगे हैंडबैग और घड़ियों के डिब्बे लेकर भागते साफ दिख रहे हैं। इस नुकसान से फ्रांस के कारोबारियों में भारी घबराहट और गुस्सा है।
दुकानों से माल लूटने के बाद अब ये चोर फ्रांस के अलग-अलग शहरों में अनधिकृत दुकानें लगाकर बैठ गए हैं। सड़क किनारे, फुटपाथ पर और गलियों में लूटा हुआ सामान खुले में बिकने के कई वीडियो सामने आए हैं। जिन हैंडबैग और परफ्यूम की असली कीमत लाखों में है, वे आम खुदरा कीमत से 80 से 90 फीसदी तक की भारी छूट पर बेचे जा रहे हैं।
कुछ स्थानीय विक्रेता राह चलते लोगों को रोककर ये ब्रांडेड चीजें मामूली दाम में बेचने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर आए वीडियो में खरीदार और विक्रेता कीमतों पर मोलभाव करते भी दिखते हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर दिख रहा हर सामान सचमुच लूटा हुआ है या नकली (First Copy), इसकी जांच फ्रांस पुलिस फिलहाल कर रही है।
सिर्फ सड़कों पर नहीं, इंटरनेट के जरिए भी चोरी के माल को बेचने की कोशिश हो रही है। पुरानी और इस्तेमाल की हुई चीजों की खरीद-बिक्री के लिए यूरोप में बेहद लोकप्रिय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'विंटेड' (Vinted) पर ऐसे शक वाले प्रोडक्ट्स के विज्ञापनों की बाढ़ आ गई थी। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा थमते ही कुछ घंटों के भीतर इस प्लेटफॉर्म पर लुई व्हिटॉन और हर्मेस के ब्रांडेड बैग्स की कई नई लिस्टिंग दिखने लगी थीं।
इन विज्ञापनों का स्वरूप देखकर शक गहरा गया कि वे लूटे गए माल से जुड़े हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए 'विंटेड' कंपनी ने तुरंत बयान जारी किया। कंपनी ने कहा कि चोरी या गैरकानूनी तरीके से हासिल चीजों की बिक्री उसके प्लेटफॉर्म पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और ऐसे सभी शक वाले अकाउंट और लिस्टिंग पर रोक लगाना शुरू कर दिया है। पुलिस और साइबर सेल की मदद से ये विज्ञापन डालने वाले यूजर्स की तलाश जारी है।
इस अभूतपूर्व हालात से कानून और व्यवस्था का गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। आंदोलन की आड़ में हुई यह लूटमार सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं है, देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी इससे बड़ा धक्का लगा है। व्यापारी संगठनों ने सरकार से सुरक्षा बढ़ाने और लुटेरों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। फ्रांस पुलिस फिलहाल सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में लगी है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।