गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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फर्जी खेल सर्टिफिकेट घोटाले में 14 पुलिसकर्मियों समेत 25 लोग गिरफ्तार

फर्जी खेल सर्टिफिकेट घोटाले में 14 पुलिसकर्मियों समेत 25 लोग गिरफ्तार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

पुणे में सरकारी नौकरी के लिए कुराश और ड्रैगनबोट के फर्जी खेल प्रमाणपत्र बनवाने के मामले में पुलिस महकमे के 14 कर्मचारी भी पकड़े गए हैं।

पुणे में सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए कुराश और ड्रैगनबोट खेल के फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने के मामले में 14 पुलिसवालों समेत कुल 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। जांच में सामने आया है कि सरकारी नौकरी में खेल के लिए रखे गए 5 फीसदी आरक्षण का गलत फायदा उठाकर फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे पुलिस और दूसरे सरकारी विभागों में भर्ती हुई।

पुणे पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सरकारी नौकरी दिलाने वाले इस बड़े फर्जी खेल सर्टिफिकेट रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस को शक है कि पिछले 10 साल में कुराश खेल के 1,500 से ज्यादा फर्जी सर्टिफिकेट बांटे गए। महाराष्ट्र कुराश संगठन के दो पदाधिकारी भी इस रैकेट में गिरफ्तार हुए हैं।

अब तक इस मामले में कुल 41 लोगों पर केस दर्ज हुआ है, जिनमें से 25 को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 14 पुलिस कर्मचारी शामिल हैं और कुछ आरोपियों को येरवडा जेल भेजा गया है। गिरफ्तार पुलिसवालों में से कुछ ट्रेनिंग पूरी करके नौकरी पर आ चुके थे, जबकि कुछ की भर्ती हाल ही में हुई थी। घोटाला खुलने के बाद फर्जी सर्टिफिकेट इस्तेमाल करने वाले 19 उम्मीदवारों को नौकरी से बर्खास्त करने का फैसला लिया गया है।

आरोपी उम्मीदवारों ने असल में किसी भी खेल स्पर्धा में हिस्सा लिए बिना ये सर्टिफिकेट हासिल किए थे। सिर्फ पुलिस ही नहीं, दूसरे सरकारी विभागों में भी इन फर्जी सर्टिफिकेट से नौकरी पाने की बात सामने आ रही है। इसलिए पुलिस संबंधित विभागों को चिट्ठी लिखकर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

इस मामले में नाम आने के बाद 5 से 6 नए भर्ती हुए पुलिस कर्मचारी अलग-अलग ट्रेनिंग सेंटरों और अपने घरों से फरार हो गए हैं। फरार आरोपियों की जानकारी राज्य की सभी पुलिस इकाइयों और ट्रेनिंग सेंटरों को भेज दी गई है, और उनकी तलाश में क्राइम ब्रांच की टीमें रवाना हो चुकी हैं।

यह घोटाला सिर्फ पुलिस भर्ती तक सीमित नहीं है। राजस्व, कृषि या दूसरे सरकारी विभागों में भी इन बोगस सर्टिफिकेट पर नौकरी हथियाने का शक है। इसलिए क्राइम ब्रांच दूसरे विभागों को पत्र लिखकर जांच करवा रही है। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के जरिए क्लास 1 और क्लास 2 के पदों पर भी ऐसे बोगस सर्टिफिकेट से कोई भर्ती हुआ है या नहीं, इसकी भी पड़ताल चल रही है। क्रीड़ा उपसंचालक कार्यालय के जिन सरकारी अधिकारियों ने इन सर्टिफिकेट को वैध मानकर मंजूरी दी, उनकी भूमिका भी संदिग्ध है, इसलिए पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है।

उम्मीदवारों के जमा किए फर्जी सर्टिफिकेट 2018-19 की स्पर्धाओं के दिखाए गए थे। लेकिन इन्हें बनाते समय घोटालेबाजों ने उन पर छत्रपती संभाजीनगर (पुराना नाम औरंगाबाद) और धाराशिव (पुराना नाम उस्मानाबाद) जैसे जिलों के नए नाम छाप दिए। महाराष्ट्र सरकार ने इन जिलों के नाम 2023 में बदले थे। ऐसे में 2018 के सर्टिफिकेट पर 2023 में बदले नाम कैसे हो सकते हैं, यह शक खेल सत्यापन अधिकारियों को हुआ। इसी एक गलती से घोटाला पकड़ में आया।

पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि 2016 से 2023 के बीच कोई अधिकृत स्पर्धा हुई ही नहीं थी। जिला संगठनों से पुरानी तारीखों के फर्जी रिकॉर्ड बनवाकर ये सर्टिफिकेट बेचे गए। जांच में यह भी सामने आया कि सरकारी नौकरी में 5 फीसदी खेल आरक्षण का फायदा दिलाने के लिए एजेंट और कुराश संगठन के पदाधिकारी एक सर्टिफिकेट के बदले उम्मीदवारों से 3 से 5 लाख रुपये वसूल रहे थे।

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