बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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20:32 IST

यूनिटी के साथ गूगल का प्लेग्राउंड, लिखकर बताइए और बन जाएगा वीडियो गेम

गूगल ने यूनिटी के साथ प्लेग्राउंड नाम का नया प्लेटफॉर्म पेश किया है, जिसमें यूजर्स सिर्फ टेक्स्ट प्रॉम्प्ट से वीडियो गेम बना सकेंगे।

यूनिटी के साथ गूगल का प्लेग्राउंड, लिखकर बताइए और बन जाएगा वीडियो गेम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

गूगल अब गेमिंग की दुनिया में भी एआई को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी में है। कंपनी ने यूनिटी (Unity) के साथ मिलकर प्लेग्राउंड नाम का एक नया प्लेटफॉर्म पेश किया है। इसकी मदद से यूजर्स सिर्फ टेक्स्ट प्रॉम्प्ट लिखकर वीडियो गेम बना सकेंगे। यानी गेम बनाने के लिए कोडिंग या लंबे डेवलपमेंट की जरूरत अब कम हो सकती है।

इस तकनीक का मकसद यह है कि गेम बनाना ज्यादा से ज्यादा लोगों की पहुंच में आए। फिलहाल इसका इस्तेमाल 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के यूजर्स ही कर पाएंगे।

प्लेग्राउंड में यूजर्स आम बोलचाल की भाषा में टेक्स्ट प्रॉम्प्ट देकर गेम बना सकते हैं और उसमें बदलाव भी कर सकते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए कोडिंग की जानकारी होना जरूरी नहीं है। यूजर को बस अपने गेम का आइडिया प्रॉम्प्ट में लिखना है, और प्लेटफॉर्म उसी के आधार पर गेम तैयार कर देगा।

इस प्लेटफॉर्म में गूगल के एआई मॉडल्स के साथ दूसरी एडवांस एआई टेक्नोलॉजी और कंपनी की मौजूदा तकनीक का भी इस्तेमाल होगा। बना हुआ गेम गूगल प्लेग्राउंड पर पब्लिश भी किया जा सकता है। वहां दूसरे यूजर्स उस गेम को डाउनलोड कर सकते हैं और खेल सकते हैं।

प्लेग्राउंड में आगे यूनिटी स्पार्क भी जोड़ा जाएगा। इसे 2026 के आखिर तक प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेट करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। यूनिटी के मुताबिक, यह ज्यादा एडवांस गेम मैकेनिक्स और हाई-क्वालिटी 3D एक्सपीरियंस बनाने में मदद करेगा।

यूनिटी स्पार्क में कुछ असेट्स एआई से तैयार किए जाएंगे, जबकि ज्यादातर इमेज और इफेक्ट्स यूनिटी की मौजूदा लाइब्रेरी से लिए जाएंगे। कंपनी ने कहा है कि जिन इंसानी कलाकारों ने ये असेट्स बनाए हैं, उन्हें क्रेडिट और मेहनताना दिया जाएगा। प्लेग्राउंड और स्पार्क, दोनों में इस्तेमाल के हिसाब से मुफ्त और पेड, यानी दो तरह के विकल्प मिलेंगे।

प्लेग्राउंड दरअसल गूगल की उस कोशिश का हिस्सा है, जिसमें कंपनी वर्ल्ड मॉडल्स तकनीक पर ज्यादा फोकस कर रही है। यह एआई टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के आधार पर वर्चुअल दुनिया बना सकता है, और यह सिर्फ भाषा समझने तक सीमित नहीं है। गूगल ने पिछले साल अपना वर्ल्ड मॉडल जिनी 3 लॉन्च किया था। इसके बाद जनवरी में कंपनी ने जिनी के जरिए आभासी दुनिया और किरदार बनाने में सक्षम एक प्रोटोटाइप भी पेश किया था।

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