मुंबई महापालिका का कामकाज होगा डिजिटल, 'ई-ऑफिस' प्रणाली लागू, 14 हजार कर्मचारी चरणबद्ध तरीके से जुड़ेंगे
बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने पूरी महापालिका में 'ई-ऑफिस' प्रणाली लागू करने का फैसला किया है। फाइलों और चिट्ठी-पत्री की प्रक्रिया अब ऑनलाइन होगी।
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बृहन्मुंबई महानगरपालिका के कामकाज में तेजी, पारदर्शिता और कुशलता लाने के लिए पूरी महापालिका में 'ई-ऑफिस' प्रणाली को असरदार तरीके से लागू करने का फैसला लिया गया है। दफ्तर की फाइलों का मैनेजमेंट, चिट्ठी-पत्री और प्रस्तावों को मंजूरी देने की पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल तरीके से होगी, यानी ये सारे काम ऑनलाइन पद्धति से निपटाए जाएंगे। पालिका आयुक्त अश्विनी भिडे ने यह जानकारी दी।
आयुक्त ने बताया कि पालिका मुख्यालय से लेकर प्रभाग कार्यालयों तक के करीब 14 हजार यूजर्स को इस प्रणाली से चरणबद्ध तरीके से जोड़ा जाएगा। यानी सभी कर्मचारी एक साथ नहीं, बल्कि एक-एक चरण में इसमें शामिल किए जाएंगे।
वरली के 'कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' में पालिका के विभागों की मासिक समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में ई-ऑफिस की पूर्व-तैयारी और अमल का जायजा लिया गया। अश्विनी भिडे इसी बैठक में बोल रही थीं। बैठक में अतिरिक्त आयुक्त डॉ. विपिन शर्मा, अभिजीत बांगर और डॉ. अविनाश ढाकणे मौजूद थे। उनके साथ सह-आयुक्त, उपायुक्त, सहायक आयुक्त और विभागों के प्रमुख भी हाजिर थे।
ई-ऑफिस ठीक से चले, इसके लिए पालिका का इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी विभाग नोडल अधिकारियों के लिए 'प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण' करवाएगा। साथ ही असली कामकाज के दौरान आने वाली तकनीकी दिक्कतें दूर करने के लिए 'केंद्रीकृत हेल्पडेस्क' शुरू किया जा रहा है, ताकि कर्मचारियों को अटकना न पड़े।
इस प्रणाली को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र ने विकसित किया है। इसके आने से पालिका में पुरानी कागजी फाइलों का इस्तेमाल बंद होगा। प्रणाली में इलेक्ट्रॉनिक फाइलें बनाना, उन्हें संबंधित अधिकारियों को भेजना, आवक-जावक पत्राचार का रिकॉर्ड रखना और डिजिटल दस्तखत से उन पर मंजूरी देना संभव होगा। यानी जो काम अब तक कागज पर होता था, वह सब इसी प्रणाली में होगा।
एक बड़ा फायदा यह है कि कोई फाइल ठीक किस टेबल पर और कितने समय से अटकी है, इसका पता वरिष्ठ अधिकारी सीधे लगा सकेंगे। फाइल कहां पेंडिंग है और मंजूरी की प्रक्रिया किस स्टेज पर है, इसे ट्रैक किया जा सकेगा। नतीजा यह होगा कि फैसले लेने की प्रक्रिया में होने वाली देरी टलेगी और प्रशासनिक जवाबदेही तय की जा सकेगी।
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