ऑफिस में किस देवता की मूर्ति रखें और किस दिशा में, जानिए वास्तु की मान्यताएं
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
वास्तुशास्त्र की मान्यता के मुताबिक ऑफिस में गणपति, लक्ष्मी, कुबेर या हनुमानजी की मूर्ति या तस्वीर रखी जाती है। पूजास्थान के लिए ईशान्य दिशा अनुकूल मानी गई है, पर मेहनत और नियोजन भी उतने ही जरूरी हैं।
ऑफिस हो, दुकान हो या कोई संस्था, हर किसी की चाह होती है कि काम में तरक्की मिले, कामयाबी हाथ लगे, पैसे की तंगी न रहे और मन को शांति मिले। इसके लिए मेहनत, नियोजन, अनुशासन और सकारात्मक सोच तो चाहिए ही, पर कई लोग अपनी आस्था के हिसाब से ऑफिस में देवता की मूर्ति या तस्वीर भी रखते हैं। अब सवाल यह उठता है कि कौन से देवता की मूर्ति रखी जाए, उसे किस दिशा में लगाया जाए और क्या अपने इष्टदेवता या कुलदेवता की पूजा ऑफिस में की जा सकती है।
हिंदू धर्मपरंपरा और वास्तुशास्त्र में श्रीगणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धिदाता माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत में उनकी पूजा की परंपरा है, और उन्हें मंगलकार्य का अधिष्ठाता भी कहा गया है। इसी वजह से ऑफिस या कारोबार की जगह पर गणपति की मूर्ति या तस्वीर रखना शुभ समझा जाता है। ऑफिस में शांत और प्रसन्न मुद्रा वाली मूर्ति रखी जा सकती है। वास्तुपरंपरा के मुताबिक कई लोग बैठी हुई मुद्रा वाले गणपति को तरजीह देते हैं।
देवी लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य, समृद्धि और सौभाग्य की देवी माना जाता है। कारोबार में आर्थिक स्थिरता रहे, उद्योग फले-फूले और लेन-देन ठीक से निपटे, इस भावना से कई व्यापारी ऑफिस में लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति रखते हैं। खासकर दिवाली के लक्ष्मीपूजन के दिन ऑफिस, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लक्ष्मीपूजन किया जाता है।
भगवान कुबेर को धन का देवता और संपत्ति का रक्षक माना जाता है। इसलिए व्यापारी, उद्यमी और आर्थिक लेन-देन से जुड़े लोग ऑफिस में कुबेर की तस्वीर या मूर्ति रखते हैं। वास्तुशास्त्र की कुछ परंपराओं में उत्तर दिशा को कुबेर से जोड़ा गया है, इसलिए पूजास्थल या कुबेर की प्रतिमा रखते वक्त इस परंपरा का ख्याल किया जाता है। हालांकि सिर्फ मूर्ति रख देने से आर्थिक फायदा पक्का हो जाता है, ऐसा समझना ठीक नहीं है।
भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति, धैर्य, निष्ठा और सेवाभाव का प्रतीक माना जाता है। काम की जगह पर चुनौतियों से जूझते वक्त हौसला बनाए रखने के लिए कई लोग हनुमानजी को याद करते हैं। ऑफिस में उनकी शांत और भक्तिभाव दर्शाने वाली तस्वीर रखी जा सकती है, और अपनी आस्था के हिसाब से पूजा या प्रार्थना भी की जा सकती है। उनके स्मरण से धैर्य, संयम और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा मिल सकती है।
अपने इष्टदेवता या कुलदेवता की तस्वीर ऑफिस में रखकर श्रद्धा से पूजा करना भी ठीक है। हर किसी की उपासना का तरीका अलग होता है। कोई श्रीराम को याद करके दिन शुरू करता है, कोई श्रीकृष्ण को, कोई भगवान शंकर को, तो कोई अपनी कुलस्वामिनी को। देवता का स्मरण करने का मकसद यही है कि मन को स्थिरता मिले, काम के प्रति निष्ठा बढ़े और आचरण अच्छा रहे।
ऑफिस में धार्मिक विधि करते समय साथ काम करने वालों की आस्था और ऑफिस के नियमों का सम्मान करना चाहिए। खासकर साझा ऑफिस में ध्यान रखें कि किसी को असुविधा न हो।
दिशा की बात करें तो वास्तुशास्त्र की प्रचलित मान्यता में ईशान यानी उत्तर-पूर्व दिशा पूजास्थल के लिए अनुकूल मानी जाती है। जगह की बनावट और उपलब्धता देखकर ऑफिस का पूजाघर इसी दिशा में रखने पर विचार किया जा सकता है। कुछ वास्तुपरंपराओं में पूर्व दिशा को भी अहमियत दी गई है।
ऑफिस में रोज पूजा करना जरूरी नहीं है। अपनी आस्था के मुताबिक सुबह काम शुरू करने से पहले देवता को नमस्कार करना, कोई मंत्र बोलना या कुछ पल शांति से प्रार्थना करना काफी हो सकता है। दिया या अगरबत्ती जलानी हो तो ऑफिस के अग्निसुरक्षा नियम, हवा की आवाजाही और साथियों की सहूलियत का ध्यान रखें। कई ऑफिसों में ज्योति या धूप जलाना मुमकिन नहीं होता। ऐसे में मन से प्रार्थना करना या देवता का स्मरण करना ही रास्ता है। यानी देवता का स्मरण मन की शांति के लिए प्रेरणा दे सकता है, पर कामयाबी के लिए मेहनत और नियोजन भी उतने ही जरूरी हैं।
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