नागपुर मनपा कर्मचारियों पर दोहरी मार: दिवाली बोनस नहीं, सूखा राहत के लिए एक दिन की सैलरी भी
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दिवाली से पहले नागपुर महानगरपालिका के कर्मचारियों को न बोनस मिला, न 15 महीने का DA एरियर। ऊपर से मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक दिन की सैलरी देने की अपील आई है।
दिवाली से ठीक पहले नागपुर महानगरपालिका (NMC) के कर्मचारियों पर दोहरी आर्थिक मार पड़ी है। एक तरफ दिवाली बोनस मिलने की कोई उम्मीद नहीं है और महंगाई भत्ते (DA) का 15 महीने का एरियर अब तक अटका हुआ है। दूसरी तरफ प्रशासन ने कर्मचारियों और अधिकारियों से सूखे से जूझ रहे किसानों की मदद के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में एक दिन की सैलरी देने की अपील की है। लंबे समय से अपना बकाया मांग रहे कर्मचारियों में इससे नाराजगी है।
NMC में दिवाली बोनस का कोई प्रावधान नहीं है। यहां कर्मचारी आमतौर पर त्योहार के लिए एडवांस लेते हैं, जिसे बाद में बराबर किस्तों में उनकी सैलरी से काटा जाता है। इस साल कर्मचारियों को उम्मीद थी कि त्योहार से पहले DA का बकाया एरियर मिल जाएगा, लेकिन प्रशासन ने इसके भुगतान का कोई आदेश अब तक जारी नहीं किया है।
महानगरपालिका आयुक्त विपिन इटनकर ने 21 अक्टूबर को एक सर्कुलर जारी किया। इसमें कर्मचारियों और अधिकारियों से कहा गया है कि सूखे की वजह से फसल के नुकसान की भरपाई के लिए वे एक दिन की सैलरी मुख्यमंत्री राहत कोष में दें। यह कदम महाराष्ट्र सरकार के 16 अक्टूबर के सर्कुलर के बाद उठाया गया है।
सर्कुलर के साथ महानगरपालिका ने एक आपत्ति फॉर्म भी जारी किया है। जो कर्मचारी योगदान नहीं देना चाहते, वे इसमें अपनी आपत्ति दर्ज कर फॉर्म अपने-अपने विभाग प्रमुख को जमा कर सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि योगदान देने वाले कर्मचारियों को इनकम टैक्स में छूट मिलेगी।
योगदान स्वैच्छिक है, फिर भी अपील का समय महानगरपालिका के कुछ कर्मचारियों को रास नहीं आया। उनका कहना है कि DA एरियर और वेतन से जुड़े दूसरे लाभों में हो रही लंबी देरी पर भी तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए।
यह नाराजगी ऐसे वक्त सामने आई है जब हाल ही में राष्ट्रीय नागपुर कॉर्पोरेशन एम्प्लॉइज एसोसिएशन ने संविधान चौक पर धरना दिया था। एसोसिएशन ने बकाया DA, 7वें वेतन आयोग के एरियर और बाकी पुरानी मांगों को पूरा करने की मांग की थी।
नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव की आचार संहिता लागू होने की वजह से एसोसिएशन तय योजना के मुताबिक प्रशासन को अपना ज्ञापन नहीं सौंप सका। आचार संहिता की वजह से कर्मचारियों की मांगों पर अब तक कोई फैसला भी नहीं हो पाया है। इस तरह मामला अटका हुआ है, जबकि कर्मचारी दिवाली से पहले राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे।
बकाया DA एरियर 15 महीने का है। इसमें आठ महीने के लिए 3 फीसदी की बढ़ोतरी और बाकी सात महीने के लिए 2 फीसदी की बढ़ोतरी शामिल है। कर्मचारियों का मानना है कि यह रकम मिल जाए तो त्योहार के मौसम में घर के बढ़े हुए खर्चों में उन्हें काफी सहारा मिलेगा।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र टिंगणे ने कहा कि कर्मचारी अपनी मर्जी से सूखा राहत में योगदान दें तो संगठन को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन त्योहार के समय कर्मचारियों की जेब पर और बोझ डालने वाले किसी भी कदम का वह विरोध करता है।
टिंगणे ने कहा, "मुख्यमंत्री राहत कोष में एक दिन की सैलरी देने का प्रस्ताव स्वैच्छिक है। जो कर्मचारी योगदान नहीं देना चाहता, वह आपत्ति फॉर्म भर सकता है। सूखाग्रस्त किसानों की मदद से हमें कोई एतराज नहीं है, लेकिन कटौती अक्टूबर की सैलरी से नहीं होनी चाहिए, खासकर त्योहार के मौसम में।"
उन्होंने यह भी कहा कि एसोसिएशन जल्द ही महानगरपालिका आयुक्त से मिलकर बकाया DA और 7वें वेतन आयोग के एरियर जारी करने की मांग रखेगी। चुनाव की आचार संहिता की वजह से मांगों का ज्ञापन पहले नहीं दिया जा सका था।
फिलहाल महानगरपालिका कर्मचारियों की परेशानी यह है कि दोनों मोर्चों पर उन्हें राहत नहीं मिली है। उनकी सैलरी से जुड़ा लंबे समय से अटका बकाया चुकाया नहीं गया है, और उनसे सूखा राहत में योगदान पर विचार करने को कहा जा रहा है। दिवाली का खर्च बढ़ रहा है और एरियर पर कोई साफ फैसला नहीं है, ऐसे में कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन उनकी मांगों पर बिना देरी ध्यान देगा।
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