नागपुर मनपा में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के 5 हजार से ज्यादा आवेदन अटके, तीन शिफ्ट में चौबीस घंटे काम
नागपुर महानगरपालिका के जन्म-मृत्यु विभाग में आवेदन बढ़ते जा रहे हैं। आयुक्त के निर्देश पर अब तीन शिफ्ट में चौबीस घंटे काम शुरू किया गया है।
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नागपुर महानगरपालिका का जन्म-मृत्यु विभाग अब "24 बाय 7" यानी चौबीसों घंटे चल रहा है। पेंडिंग आवेदनों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा था। इसे देखते हुए महानगरपालिका आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर ने काम की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए।
इसके बाद विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले डॉ. गोवर्धन नवघरे ने तुरंत प्लानिंग करके कर्मचारियों की तीन शिफ्ट बनाई हैं। हर शिफ्ट में तीन कर्मचारी लगाए गए हैं और हर शिफ्ट आठ घंटे की है।
एक प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पूरी करने के लिए आम तौर पर चार कर्मचारियों की जरूरत होती है, लेकिन फिलहाल तीन कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। रविवार को सिर्फ एक टीम काम करती है और बाकी दो टीमों को आराम दिया जाता है।
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों के लिए रोज करीब 100 आवेदन आ रहे हैं, जबकि सिर्फ 40 आवेदनों का ही निपटारा हो पा रहा है। इसी वजह से पेंडिंग आवेदनों की संख्या पांच हजार तक पहुंच गई है। नए बारकोड वाले प्रमाणपत्र के लिए लोगों को 15 से 20 दिन इंतजार करना पड़ रहा है।
डॉ. नवघरे की जानकारी के मुताबिक 2016 के बाद के जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों के आवेदन की प्रक्रिया अपेक्षाकृत ठीक चल रही है। असली चुनौती 2016 से पहले के रिकॉर्ड खोजने की है। प्रमाणपत्र देने के लिए 120 साल तक के पुराने रिकॉर्ड खंगालने पड़ रहे हैं।
पुराने जमाने में जन्मे या गुजरे लोगों के रिश्तेदारों को भी अलग-अलग सरकारी और निजी कामों के लिए प्रमाणपत्र चाहिए होते हैं। इसलिए पुराने रिकॉर्ड ढूंढने और उनकी जांच करने में कर्मचारियों का काफी वक्त लग रहा है।
धीमी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सीआरएस (सेंट्रल रजिस्ट्रेशन सिस्टम) पोर्टल की व्यवस्था लागू की है। यह व्यवस्था महानगरपालिका के लिए परेशानी बन गई है। पहले जन्म-मृत्यु विभाग में प्रमाणपत्र की प्रक्रिया के लिए पांच लॉगिन उपलब्ध थे।
नई प्रणाली में फिलहाल सिर्फ एक ही लॉगिन है, जिससे काम की रफ्तार धीमी हो गई है। ऊपर से हर प्रमाणपत्र को मंजूरी देने के लिए जिला स्वास्थ्य अधिकारी के मोबाइल पर आने वाला ओटीपी जरूरी होता है। ओटीपी मिलने और आगे की प्रक्रिया पूरी करने में करीब 10 से 15 मिनट लग जाते हैं। नतीजा यह है कि रोज आने वाले आवेदनों का वक्त पर निपटारा मुश्किल हो रहा है।
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों में देरी का मुद्दा सितंबर में हुई महानगरपालिका की आम सभा में पार्षदों ने उठाया था। उन्होंने बताया था कि एक ही लॉगिन की वजह से लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है। अब आयुक्त ने भी इस समस्या को गंभीरता से लिया है। ज्यादा लॉगिन मिलें, इसके लिए राज्य सरकार के जरिए केंद्र सरकार से मांग की जा रही है।