नवरात्रि में देवी का कुंकुमार्चन क्यों होता है, कौन कर सकता है यह विधि
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कुंकुमार्चन देवी की उपासना की एक अहम धार्मिक विधि मानी जाती है। नवरात्रोत्सव, ललिता पंचमी, शुक्रवार और पूर्णिमा के दिन कई जगह यह विधि की जाती है। कुमकुम को सौभाग्य, मंगल और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
हिंदू धर्म में देवी की उपासना को खास महत्त्व दिया गया है। आदिशक्ति की आराधना में अलग-अलग पूजा, अभिषेक, मंत्र जाप, स्तोत्र पाठ और धार्मिक विधियां की जाती हैं। इनमें से एक अहम विधि कुंकुमार्चन है। खासकर नवरात्रोत्सव में दुर्गादेवी, महालक्ष्मी, तुलजा भवानी और ललितादेवी के मंदिरों में और कई घरों में कुंकुमार्चन किया जाता है।
देवी को कुमकुम चढ़ाते वक्त उनकी दिव्य शक्ति का स्मरण किया जाता है। श्रद्धालु इस श्रद्धा से कुंकुमार्चन करते हैं कि देवी की कृपा मिले, परिवार में सुख-शांति रहे और जिंदगी की मुश्किलों का सामना करने की ताकत मिले।
कुंकुमार्चन उस विधि को कहते हैं, जिसमें देवी का नामस्मरण या मंत्रोच्चार करते हुए देवी की मूर्ति, प्रतिमा या श्रीयंत्र पर कुमकुम चढ़ाया जाता है। इसमें देवी की नामावली, अष्टोत्तरशतनामावली, सहस्रनामावली, ललितासहस्रनाम या परंपरा के हिसाब से तय देवीमंत्र बोला जाता है। हर नाम के उच्चारण के साथ देवी को कुमकुम अर्पण किया जाता है।
कुछ परंपराओं में देवी के चरणों से मस्तक तक कुमकुम चढ़ाया जाता है, जबकि कुछ जगह सिर्फ चरणों पर चढ़ाने का रिवाज है। कुछ उपासना पद्धतियों में श्रीयंत्र पर भी कुंकुमार्चन होता है। इस विधि में मंत्र जाप और कुमकुम अर्पण, दोनों का महत्त्व है। देवी के नाम का स्मरण करते हुए मन एकाग्र करना और उनके प्रति श्रद्धा जताना इसका मुख्य भाव है।
भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में कुमकुम को मंगलचिन्ह माना जाता है। विवाहित स्त्रियों के सौभाग्य से इसका संबंध जोड़ा जाता है। देवपूजा, धार्मिक समारोह और शुभ कार्यों में भी कुमकुम का इस्तेमाल होता है। देवी आदिशक्ति का स्वरूप हैं, इसलिए उनकी पूजा में लाल रंग को खास अहमियत दी जाती है। लाल रंग शक्ति, चैतन्य, सामर्थ्य और मंगल का प्रतीक माना जाता है। देवी को कुमकुम चढ़ाना उनके शक्तिस्वरूप के प्रति आदर जताना है, ऐसी धार्मिक श्रद्धा है।
कुंकुमार्चन के लिए नवरात्र को खास अहम समय माना जाता है। इस दौरान आदिशक्ति के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है और देवी के मंदिरों में तथा घर-घर में कुंकुमार्चन का आयोजन किया जाता है। शारदीय नवरात्रोत्सव और चैत्र नवरात्र में यह उपासना का हिस्सा होता है। ललिता पंचमी, अष्टमी, नवमी, शुक्रवार और पूर्णिमा के अलावा कुल की रीति, घराने की परंपरा और उपास्य देवता के मुताबिक दूसरे दिनों में भी यह विधि की जा सकती है।
कुंकुमार्चन के लिए सिर्फ विवाहित होना आम तौर पर जरूरी शर्त नहीं है। देवी की उपासना करने की इच्छा रखने वाली स्त्री या पुरुष अपने घर की परंपरा और पूजा पद्धति के हिसाब से यह विधि कर सकता है। कई परिवारों में विवाहित स्त्रियां परिवार की सुख-समृद्धि, सौभाग्य और मंगलता के लिए देवी का कुंकुमार्चन करती हैं। नवरात्र में या शुक्रवार को देवी की पूजा कर कुमकुम चढ़ाने का रिवाज कई जगह है।
अविवाहित लड़कियां या कुमारिकाएं भी अपने घर की धार्मिक परंपरा के मुताबिक देवी की पूजा और कुंकुमार्चन कर सकती हैं। देवी को सबकी माता माना जाता है, इसलिए यह विधि सिर्फ विवाहित स्त्रियों के लिए है, ऐसा आम तौर पर नहीं कहा जा सकता।
विधवा स्त्रियां कुंकुमार्चन न करें, ऐसा कोई सर्वमान्य हिंदू धार्मिक नियम है, यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता। अलग-अलग समाजों, संप्रदायों और परिवारों की परंपराओं में इसे लेकर अलग-अलग प्रथाएं मिल सकती हैं।
पुरुष भी देवी की उपासना कर सकते हैं। कुछ परंपराओं में पुरुष देवी का नामस्मरण करते हुए कुमकुम चढ़ाते हैं या श्रीयंत्र पर कुंकुमार्चन करते हैं। हालांकि कुछ खास धार्मिक विधियों, संप्रदायों या मंदिरों में तय नियम हो सकते हैं। ऐसे में उस परंपरा का मार्गदर्शन लेना चाहिए।
कुंकुमार्चन में स्वच्छता, श्रद्धा और एकाग्रता को अहमियत दी जाती है। घर पर यह विधि सादे तरीके से की जा सकती है। इसमें देवी की नामावली या मंत्र बोलने की परंपरा है और मंत्र उपास्य देवता तथा घर की पूजा पद्धति के हिसाब से चुना जा सकता है। देवी की आम उपासना के लिए यह मंत्र बोला जाता है: ॥ ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥
इसके अलावा देवी की अष्टोत्तरशतनामावली, ललितासहस्रनाम या अपने कुलदेवता की नामावली बोलते हुए भी कुमकुम चढ़ाया जा सकता है। जिसने विशिष्ट मंत्र दीक्षा ली है, वह गुरु के बताए मंत्र के हिसाब से उपासना करे। हर व्यक्ति एक ही खास मंत्र बोले, ऐसा कोई सर्वमान्य नियम नहीं है।
धर्म, ज्योतिष, वास्तु जैसे विषयों की जानकारी सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए है। इससे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकारों की सलाह जरूरी है।