मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

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17:10 IST

नारायणगड के दशहरा मेले में जरांगे पाटील ने की किसानों के लिए पांच मांगें

मराठा आंदोलक मनोज जरांगे पाटील ने बीड जिले के नारायणगड में दशहरा मेले में किसानों के लिए सरकार से पांच मांगें रखीं।

नारायणगड के दशहरा मेले में जरांगे पाटील ने की किसानों के लिए पांच मांगें तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दशहरे के मौके पर राज्य में सियासी मेले हो रहे हैं। इसी सिलसिले में मराठा आंदोलक मनोज जरांगे पाटील का दशहरा मेला भी आज बीड जिले के नारायणगड में हुआ। वहां उन्होंने मराठा आरक्षण के साथ-साथ राज्य की सूखे जैसी हालत और किसानों के सवालों पर सरकार को घेरा। किसानों की आर्थिक हालत का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने सरकार के सामने पांच मुख्य मांगें रखीं।

जरांगे पाटील ने सरकार को चेतावनी भी दी। उन्होंने साफ किया कि 2029 के चुनाव में मराठा समाज के लोग जवाब देंगे। उन्होंने अपील की कि 2029 के चुनाव में जो नेता समाज के सवालों को नजरअंदाज करते हैं, उन्हें समर्थन न दिया जाए।

जरांगे पाटील ने कहा कि पिछले तीन साल में वे खुद से किसी भी नेता से बात करने नहीं गए। राजनीतिक नेताओं को सुनाते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी और नेताओं के प्रति प्यार से ज्यादा जरूरी समाज का हित है। उनकी बात यह थी कि मराठा समाज के लोग नेताओं के साथ खड़े रहते हैं, लेकिन नेताओं को भी समाज की दिक्कतों पर ध्यान देना चाहिए।

किसानों के बारे में जरांगे पाटील ने कहा कि राज्य का किसान संकट में है, और सरकार से प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की मदद मांगी। भाषण में उन्होंने बताया कि सूखे का साया, खेती का नुकसान और बढ़ता आर्थिक बोझ किसानों के सामने बड़ी मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। उन्होंने हिसाब भी रखा कि किसानों को पांच हजार रुपये की मदद मिले, तो भी आने-जाने, पेट्रोल और दूसरे खर्चों में ही बड़ी रकम निकल जाती है। इसलिए उनके मुताबिक किसानों को पूरी आर्थिक मदद मिलना जरूरी है।

जरांगे पाटील की पांच मांगें ये हैं। किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की मदद दी जाए। किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए। फसल बीमा की पूरी रकम किसानों के खाते में जमा की जाए। अटका हुआ कृषि अनुदान दिया जाए। और गांव-गांव में चारा छावनियां शुरू की जाएं।

मराठा आरक्षण के अमल पर भी जरांगे ने नाराजगी जताई। उन्होंने मुद्दा उठाया कि कुणबी रिकॉर्ड मिलने के बावजूद कुछ जगहों पर अर्जी नहीं ली जा रही और प्रमाणपत्र मिलने में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की चेतावनी भी दी।

इसके अलावा जरांगे पाटील ने कहा कि उनसे मिलने के लिए किसी को पैसे देने की जरूरत नहीं है। जो लोग उनके नाम का इस्तेमाल करके पैसे मांगते हैं, उन्हें उन्होंने चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसी बात की जानकारी मिली तो वे संबंधित लोगों को छोड़ेंगे नहीं।

अब नजर इस पर है कि सरकार किसानों की इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और मराठा आरक्षण के सवाल पर आगे कौन से कदम उठाए जाते हैं।

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