शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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नरक चतुर्दशी 8 नवंबर को, सूरज निकलने से पहले अभ्यंग स्नान की परंपरा और मान्यता

नरक चतुर्दशी 8 नवंबर को, सूरज निकलने से पहले अभ्यंग स्नान की परंपरा और मान्यता तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 टीम

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर तेल और उबटन से सुबह जल्दी नहाने की रीत है। कथा, आयुर्वेद और अकाल मृत्यु के डर से जुड़ी मान्यता क्या है, पढ़ें।

कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस साल यह रविवार, 8 नवंबर को पड़ रही है। इस दिन सूरज निकलने से पहले नहाने की पुरानी परंपरा है। सुबह जल्दी उठकर शरीर पर तेल लगाया जाता है और फिर उबटन के साथ स्नान किया जाता है, जिसे अभ्यंग स्नान कहते हैं।

धार्मिक मान्यता के मुताबिक इस दिन सुबह जल्दी नहाने का खास महत्व है। कहा जाता है कि यह परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं है, सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद है। आइए देखते हैं कि सूरज निकलने से पहले अभ्यंग स्नान के पीछे कौन सी बातें बताई जाती हैं।

पहले बात पौराणिक कथा की। कथा के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने असुर नरकासुर का वध किया था और उसकी कैद से 16,108 लड़कियों को आजाद कराया था। इस जीत की खुशी में और नरक के डर से छुटकारा पाने के लिए सुबह स्नान करने की रीत शुरू हुई। बताया जाता है कि जब राक्षस का अंत हुआ तो चारों तरफ खुशी का माहौल था।

तभी से सुबह जल्दी उठकर नहाने की परंपरा चली आ रही है और आज भी निभाई जाती है। लोग इस कथा को याद करते हुए भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि उनके जीवन की सारी बुरी शक्तियों का नाश हो।

अब सेहत वाले पहलू पर आएं। इस दिन उबटन लगाकर नहाने की बात कही जाती है और इस रीत को सेहत से जोड़कर देखा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार मौसम बदलने पर त्वचा की हिफाजत के लिए तेल की मालिश और उबटन बहुत फायदेमंद माना गया है। ठंड की शुरुआत में मौसम बदलने लगता है, इसलिए शरीर का खास खयाल रखना जरूरी होता है।

पुराने जमाने से इस दिन पूरे शरीर पर तेल की मालिश करके, उबटन लगाकर नहाने की परंपरा रही है। कहा जाता है कि इससे त्वचा को पोषण मिलता है और उसकी हर चीज से हिफाजत होती है। शायद इसीलिए हमारे बुजुर्गों ने इस स्नान को पूजा-पाठ के रूप में जोड़ दिया।

सुबह जल्दी नहाने से सकारात्मक ऊर्जा मिलने की बात भी कही गई है। सूरज निकलने से पहले स्नान करने पर शरीर में नई ऊर्जा आती है और आलस फौरन दूर हो जाता है। माना जाता है कि भोर में नहाने से इंसान के भीतर की नकारात्मक ऊर्जा हटती है और मन में नए विचार आते हैं। सुबह नहाने पर शरीर तरोताजा लगता है, मन शांत रहता है और आसपास का माहौल भी अच्छा बना रहता है। दिवाली के दिनों में इन नियमों को निभाने से लोग तनाव से मुक्त होकर पूरे जोश के साथ त्योहार की तैयारियों में शामिल होते हैं।

आखिर में अकाल मृत्यु से जुड़ी मान्यता। धार्मिक श्रद्धा है कि ऐसा करने से पूरे साल अकाल मृत्यु और नरक जाने का डर नहीं रहता। मान्यता यह भी है कि जो व्यक्ति इस दिन सूरज निकलने से पहले उठकर अभ्यंग स्नान करता है, उसके जीवन की सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। कहा जाता है कि यह स्नान इंसान को हर डर से दूर रखता है और मानसिक शांति देता है। पुरानी परंपराओं को मानने वाले लोग आज भी ये नियम बड़ी श्रद्धा से निभाते हैं, ताकि उनके परिवार पर कोई संकट न आए। इसी तरह सुबह जल्दी उठकर किया गया स्नान जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा लेकर आता है, ऐसा माना जाता है।

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