नांदूर मधमेश्वर के किसानों को रबी में दो और गर्मी में एक आवर्तन मिलेगा
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जलसंपदा मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने कहा कि जनवरी में पानी के स्टॉक की समीक्षा के बाद अतिरिक्त आवर्तन पर फैसला होगा।
छत्रपती संभाजीनगर के नांदूर मधमेश्वर परियोजना के लाभ क्षेत्र में आने वाले किसानों के लिए पानी का नया प्लान तय हुआ है। रबी सीजन में दो और गर्मी के सीजन में एक, यानी कुल तीन आवर्तन देने की तैयारी है। यह जानकारी जलसंपदा मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने सोमवार को दी।
सोमवार को विभागीय आयुक्त कार्यालय में मंत्री विखे पाटील की अध्यक्षता में नांदूर मधमेश्वर परियोजना की नहर सलाहकार समिति की बैठक हुई। बैठक में सांसद संदिपान भुमरे, विधायक प्रशांत बंब, रमेश बोरनारे, विठ्ठलराव लंघे पाटील, प्रतापसिंह पाटील और अंबादास दानवे मौजूद थे। जिला परिषद अध्यक्ष अविनाश गलांडे, विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत, जिलाधिकारी विनय गौडा जी. सी. और जिला परिषद की सीईओ मिन्नू पी. एम. भी बैठक में शामिल हुए। गोदावरी मराठवाडा पाटबंधारे विकास महामंडळ के कार्यकारी संचालक जयंत गवळी, जलसंपदा विभाग के अधीक्षक अभियंता राजेंद्र धोडपकर और दूसरे संबंधित विभागों के अफसर भी हाज़िर थे।
जलसंपदा विभाग के अफसरों ने बैठक में परियोजना में पानी की उपलब्धता, अलग-अलग बांधों में स्टॉक, मंज़ूर कोटा और प्रस्तावित आवर्तनों का प्रेजेंटेशन रखा। प्रस्ताव के मुताबिक रबी का पहला आवर्तन 20 नवंबर से 5 दिसंबर 2026 के बीच एक टीएमसी पानी का होगा। दूसरा आवर्तन 19 फरवरी से 12 मार्च 2027 के बीच 1.355 टीएमसी पानी का प्रस्तावित है। गर्मी के सीजन के लिए 20 अप्रैल से 1 मई 2027 के बीच एक आवर्तन प्रस्तावित किया गया है।
सूखे के हालात को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पहले आवर्तन के लिए प्रस्तावित एक टीएमसी पानी कम पड़ सकता है। किसानों की सिंचाई की ज़रूरत को ध्यान में रखकर उन्होंने इस आवर्तन को करीब दो टीएमसी तक बढ़ाने की मांग की। डॉ. विखे पाटील ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिए कि असल ज़रूरत और उपलब्ध पानी को देखकर बढ़ा हुआ पानी देने का प्लान बनाएं।
विखे पाटील ने साफ किया कि पहले आवर्तन के बाद जनवरी में उपलब्ध पानी का स्टॉक, सिंचाई के लिए असल में हुआ इस्तेमाल और अगले सीजन की ज़रूरतों की दोबारा समीक्षा की जाएगी। उसी के आधार पर अतिरिक्त पानी या एक और आवर्तन देने का फैसला लिया जा सकेगा।
मंत्री ने यह भी कहा कि पीने के पानी की ज़रूरत पर असर डाले बिना खेती के लिए पानी की योजना बनाई जाए। सूखे में उपलब्ध पानी का किफ़ायत और कुशलता से इस्तेमाल हो, ताकि लाभ क्षेत्र के किसानों को ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा मिले। इसके लिए संबंधित अफसर ठीक से प्लानिंग करें, ऐसी हिदायत भी उन्होंने दी।
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