नाना पाटेकर के निधन पर धानोरकर और मुनगंटीवार ने दी श्रद्धांजलि
वरिष्ठ अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता नाना पाटेकर का गुरुवार को गोवा में हृदयाघात से निधन हो गया। चंद्रपुर जिले से शोक की लहर है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
चंद्रपुर: वरिष्ठ अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता नाना पाटेकर के निधन की खबर मिलते ही चंद्रपुर जिले में शोक जताया जा रहा है। गुरुवार, 8 अक्टूबर को गोवा में हृदय का तेज दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ। वे 75 साल के थे। इस पर सांसद प्रतिभा धानोरकर और विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
दोनों नेताओं ने नाना पाटेकर को मिले राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्मश्री सम्मान को याद किया। उन्होंने नाम फाउंडेशन के जरिए किसानों के हित में किए गए काम का भी जिक्र किया। दोनों का कहना है कि उनके जाने से मराठी और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा खालीपन आ गया है।
सांसद प्रतिभा धानोरकर ने शोक जताते हुए कहा, "आज शब्द कम पड़ रहे हैं और मन सुन्न हो गया है। अपने समृद्ध अभिनय से देश भर में राष्ट्रीय पुरस्कार की छाप छोड़ने वाला एक महान कलाकार था। दूसरी तरफ सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र को नाम फाउंडेशन की जल संरक्षण की मुहिम से उम्मीद की किरण दिखाने वाला किसानों का सच्चा हमदर्द आज हमारे बीच से चला गया।"
आगे उन्होंने कहा, "जब-जब महाराष्ट्र संकट में आया और सूखे का साया गहराया, तब उन्होंने सिर्फ आंसू नहीं पोंछे, बल्कि मिट्टी से रिश्ता निभाते हुए काम का पहाड़ खड़ा किया। कला में कामयाबी की सबसे ऊंची चोटी छूने के बाद भी उनके पैर हमेशा जमीन पर रहे और मन आम आदमी के दुख से जुड़ा रहा। ऐसा 'देवमानुष' होना फिर मुमकिन नहीं। उनके जाने से जो खालीपन आया है, वह कभी भरने वाला नहीं है। ईश्वर उनकी आत्मा को चिरशांति दे और इस गहरे दुख से उबरने की ताकत उनके परिवार, साथियों और दुनिया भर के चाहने वालों को दे।"
विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने अपने शोक संदेश में कहा, "नाना पाटेकर सिर्फ अपनी अलग अभिनय शैली बनाने वाले कमाल के कलाकार नहीं थे। वे ऐसे संवेदनशील इंसान थे जो अपनी हर भूमिका से समाज के मन को छू लेते थे और मौके पर अपने खास अंदाज से दर्शकों को खूब हंसाते भी थे। उनके निधन से मराठी और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के एक अमर अभिनय दौर पर मानो परदा गिर गया है।"
नाना पाटेकर को 'परिंदा', 'क्रांतिवीर' और 'अग्निसाक्षी' फिल्मों के बेहतरीन अभिनय के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिले थे। साल 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 'यशवंत', 'अब तक छप्पन', 'राजनीति', 'नटसम्राट' और 'वेलकम' जैसी अनगिनत फिल्मों और नाटकों में उन्होंने हर तरह के किरदार निभाकर अपनी छाप छोड़ी।
उनके योगदान को सराहते हुए मुनगंटीवार ने कहा, "उनका अभिनय सिर्फ डायलॉग बोलना नहीं था। वह भावनाओं का उफान और हकीकत का आईना था। आवाज की गहराई, संवादों की धार और किरदार में पूरी तरह घुल जाने की अदा से उनकी भूमिकाएं अमर हो गईं। अभिनय के साथ-साथ नाम फाउंडेशन के जरिए किसानों, सूखाग्रस्त लोगों और गांव-देहात के जरूरतमंदों के लिए उन्होंने जो काम किया, वह उनके दिल की इंसानियत को दिखाता है। नाना पाटेकर का नाम अब भारतीय अभिनय के इतिहास का एक अमर अध्याय है। इस महान कलाकार की यादों को मेरा विनम्र नमन।"