दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन, दिल का तेज दौरा पड़ा
जाने-माने अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में दिल का तेज दौरा पड़ने से निधन हो गया। फिल्म इंडस्ट्री और रंगमंच में शोक की लहर है।
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जाने-माने अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 साल की उम्र में दिल का तेज दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। उनके अचानक चले जाने से पूरी फिल्म इंडस्ट्री और रंगमंच की दुनिया में शोक की लहर है।
नाना ने अपनी अदाकारी से लोगों को कभी जी भरकर हंसाया तो कभी रुला दिया। उनके कई डायलॉग आज भी चाहने वालों को ज़ुबानी याद हैं। दमदार अभिनय, भारी आवाज़ और डायलॉग बोलने का अपना अलग अंदाज़, यही नाना की पहचान थी और इन्हीं डायलॉग की वजह से वे इतने मशहूर हुए। उनके जाने से सिनेमा में जो खालीपन आया है, उसे भरना आसान नहीं होगा। आइए, उनकी चर्चित भूमिकाओं और मशहूर डायलॉग पर एक नज़र डालते हैं।
साल 1997 की फिल्म 'यशवंत' में नाना ने पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया था। उसका यह डायलॉग लोगों को खूब याद है: "आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने, अब मुझे लटका देंगे, ज़ुबान ऐसे बाहर आएगी, आंखें बाहर आएंगी, थोड़ी देर लटकता रहूंगा, फिर ये मेरा भाई मुझे नीचे उतारेगा.. फिर आप चर्चा करते घर चले जाओगे, खाना खाओगे, सो जाओगे।"
उनके कुछ और मशहूर डायलॉग ये रहे:
"एक मच्छर, साला एक मच्छर इंसान को आदमी से हिजड़ा बना देता है। एक खटमल पूरी रात को अपाहिज कर देता है। सुबह घर से निकलो, भीड़ का एक हिस्सा बनो। शाम को घर जाओ, दारू पियो और बच्चे पैदा करो।"
"धंधा किशन, धंधे में कोई किसी का भाई नहीं होता।"
"एक पुलिस इंस्पेक्टर ज्वाइंट कमिश्नर के साथ क्या बहस करेगा? उनको भी कोई बड़ा साहब बोला होगा, हम सब सिस्टम का हिस्सा हैं। सिस्टम डिसाइड करता है, अपुन फॉलो करता है।"
"भगवान का दिया सब कुछ है। दौलत है, शोहरत है, इज्जत है।"
"जान मत मांगना, इसकी बाजार में कोई कीमत नहीं है।"
मराठी फिल्म और नाटक 'नटसम्राट' के डायलॉग भी उतने ही याद किए जाते हैं। इसका एक संवाद है: "कोई घर देगा क्या, घर?" इसी फिल्म में अप्पा और कावेरी के बीच का संवाद भी है: "तू मुझे बहुत अच्छी लगती है। मैं तुझसे बहुत बहुत प्यार करता हूं।"
एक और संवाद में कहा गया है: "To be or not to be... जीना या मरना, यही एक सवाल है। इस दुनिया के कूड़े के ढेर पर झूठी पत्तल का टुकड़ा बनकर बेशर्म, लाचार खुशी से जिया जाए?"
इसी कड़ी का एक और डायलॉग है: "हजारों की संपत्ति जमा करके गुलाल की तरह उड़ा दी, वही नटसम्राट अपने ही बच्चों के घर में चोर ठहराया गया!"