गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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11:22 IST

नाना पाटेकर ने 1.5 करोड़ की कार का इरादा छोड़ किसान परिवारों की मदद की

लेखक रणबीर पुष्प ने एक पॉडकास्ट में बताया कि किसान परिवारों का हाल देखकर नाना पाटेकर ने महंगी कार लेने का फैसला बदल दिया।

नाना पाटेकर ने 1.5 करोड़ की कार का इरादा छोड़ किसान परिवारों की मदद की तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर अपनी दमदार एक्टिंग के साथ-साथ समाज के लिए किए गए कामों की वजह से भी जाने जाते हैं। किसानों और उनके परिवारों की मदद के उनके कई किस्से पहले भी सामने आ चुके हैं। अब लेखक रणबीर पुष्प ने नाना की ज़िंदगी का ऐसा ही एक किस्सा सुनाया है। उनके मुताबिक किसान परिवारों की हालत देखकर नाना ने करीब 1.5 करोड़ रुपये की लग्ज़री कार खरीदने का इरादा बदल दिया था।

रणबीर पुष्प ने यह किस्सा सिद्धार्थ कन्नन के पॉडकास्ट में सुनाया। उनके कहे अनुसार, नाना एक बार टीवी पर उन परिवारों का हाल देख रहे थे जो किसानों की आत्महत्या के बाद उजड़ गए थे। इन खबरों का उन पर गहरा असर पड़ा। उसी समय नाना करीब 1.5 करोड़ रुपये की कीमत वाली एक कार लेने की तैयारी में थे। लेकिन किसान परिवारों की तकलीफ देखने के बाद उन्होंने कार न लेने का फैसला कर लिया। रणबीर पुष्प ने बताया कि नाना ने तय किया कि यह पैसा ज़रूरतमंद किसान परिवारों की मदद में लगाया जाएगा।

रणबीर पुष्प की यादों के मुताबिक, नाना ने अपने एक कलाकार दोस्त को बुलाया और उनसे किसान परिवारों के लिए 15 हज़ार रुपये प्रति परिवार के चेक बनाने को कहा। इस किस्से से यह बात सामने आती है कि इस मदद के पीछे नाम कमाने का कोई मकसद नहीं था, बल्कि ज़रूरतमंद परिवारों को सहारा देने की भावना थी।

किसानों के सवालों से नाना का रिश्ता इसके बाद और गहरा हुआ। नाना पाटेकर और अभिनेता मकरंद अनासपुरे ने 2015 में नाम फाउंडेशन की स्थापना की। इस संस्था के ज़रिए महाराष्ट्र के किसान और सूखे से जूझ रहे परिवारों के लिए मदद का काम किया गया। इससे पहले भी नाना ने विदर्भ के 62 और मराठवाड़ा के 113 किसान परिवारों को 15-15 हज़ार रुपये के चेक दिए थे, ऐसा रिकॉर्ड में दर्ज है।

नाना के स्वभाव को लेकर अक्सर उनके साफ बोलने और गुस्सैल मिज़ाज की चर्चा होती है। मगर रणबीर पुष्प के सुनाए इस किस्से में उनकी संवेदनशीलता का एक अलग पहलू दिखता है। महंगी कार लेने के बजाय ज़रूरतमंद किसान परिवारों की मदद का फैसला करने वाला यह वाकया अब फिर चर्चा में है। किसानों के लिए नाना का काम किसी एक घटना तक सीमित नहीं रहा। नाम फाउंडेशन के ज़रिए किसानों और गांवों के परिवारों के लिए मदद का सिलसिला जारी है, इसीलिए उनके इस फैसले की बात आज भी होती है।

इसी बातचीत में रणबीर पुष्प ने नाना का एक और किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि एक बार नाना ने किसी को गाड़ी से प्लास्टिक की बोतल बाहर फेंकते देखा। नाना ने अपनी गाड़ी रोकी और वह बोतल उठा ली। फिर उन्होंने उस आदमी की गाड़ी रुकवाई, उससे खिड़की का शीशा नीचे करने को कहा और बोले, "भारत को साफ कौन रखेगा? गांधीजी चले गए, पर आप अभी भी इस धरती पर हैं। तो एक नागरिक के तौर पर देश को साफ रखना क्या आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है? मैं आपकी गाड़ी पर बोतलें फेंक दूं क्या?"

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