नाना पाटेकर नहीं रहे: जब भीड़ से अशोक सराफ को बचाकर रिक्शे में ले गए थे नाना
75 साल की उम्र में गोवा के घर पर नाना पाटेकर का निधन हुआ। उनकी दोस्ती का एक किस्सा, जिसमें उन्होंने नाटक के दौरान भड़की भीड़ से अशोक सराफ को बचाया था, फिर चर्चा में है।
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वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से पूरी फिल्म इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। 75 साल की उम्र में उन्होंने गोवा में अपने घर पर आखिरी सांस ली। नाना को उनकी दमदार एक्टिंग के लिए तो याद किया ही जाता है, उनकी दोस्ती के कई किस्से भी हमेशा चर्चा में रहे। ऐसा ही एक किस्सा वरिष्ठ अभिनेता अशोक सराफ से जुड़ा है, जो अब नाना के जाने के बाद फिर से याद किया जा रहा है।
नाना पाटेकर और अशोक सराफ की दोस्ती मराठी और हिंदी, दोनों फिल्म इंडस्ट्री में खास तौर पर मशहूर रही। दोनों ने अपने करियर की शुरुआत रंगमंच से की थी। नाना के संघर्ष के दिनों में अशोक सराफ ने उनका साथ दिया था। और एक बार ऐसा मौका भी आया, जब नाना ने अशोक सराफ की जान बचाई और उनके लिए फरिश्ते जैसा काम किया।
इस वाकये का जिक्र खुद अशोक सराफ ने एक इंटरव्यू में किया था। यह घटना मशहूर मराठी नाटक 'हमीदा बाईची कोठी' के एक शो के दौरान हुई थी।
शो चल ही रहा था कि अचानक तकनीकी खराबी आ गई। इस वजह से शो रद्द करना पड़ा। शो रद्द होते ही दर्शकों में गुस्सा भड़क उठा। हालात धीरे-धीरे काबू से बाहर होने लगे और गुस्साई भीड़ कलाकारों पर हमला करने लगी।
अचानक मचे इस हंगामे से कलाकारों में भी डर फैल गया था। ऐसे में नाना पाटेकर ने सूझबूझ दिखाई और अशोक सराफ को किसी सुरक्षित जगह पहुंचाने का फैसला किया।
अशोक सराफ के बताए मुताबिक, हंगामे के बीच नाना ने अंधेरे में उन्हें सही-सलामत बाहर निकाला। नाना ने उन्हें खींचकर रिक्शे में बिठाया और भीड़ से दूर एक सुरक्षित जगह ले गए। उस पल नाना ने जो हिम्मत दिखाई, उसी की वजह से अशोक सराफ की जान बची। यह किस्सा सुनाते वक्त अशोक सराफ ने नाना के लिए अपना शुक्रिया जताया था।
अशोक सराफ ने कहा था कि उस वक्त अगर नाना मदद के लिए न दौड़ते, तो हालात बहुत गंभीर हो सकते थे। गुस्साई भीड़ के बीच से नाना उन्हें निकाल लाए और सुरक्षित जगह पहुंचा दिया। उनका कहना था कि नाना नहीं होते तो उनके साथ क्या होता, यह पता नहीं।
इस तरह उस मुश्किल घड़ी में नाना पाटेकर अशोक सराफ के लिए सचमुच फरिश्ता साबित हुए। दोनों की दोस्ती सिर्फ पर्दे या मंच तक सीमित नहीं थी, बल्कि मुसीबत के वक्त एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़े रहने वाली थी। नाना के निधन के बाद यह पुराना किस्सा फिर चर्चा में है और कई लोगों को उन दोनों की दोस्ती याद आ रही है।