नागपुर पुलिस अब डेटा से तय करेगी स्टाफ, 130 गश्ती टीमों पर लगेंगे ट्रैकिंग डिवाइस
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर शहर की पुलिसिंग अब पुराने ढर्रे पर नहीं, डेटा और जरूरत के हिसाब से चलाने की तरफ बढ़ रही है। शहर के हर पुलिस थाने के लिए अपराध, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, इमरजेंसी कॉल और उपलब्ध मनुष्यबल समेत 19 मानकों पर अलग-अलग डेटा तैयार किया गया है।
इसी डेटा से तय होगा कि किस थाने को अतिरिक्त पुलिस बल, गाड़ियां और दूसरे संसाधन चाहिए। गुरुवार को हुए 'मीट द प्रेस' कार्यक्रम में सीपी विश्वास नांगरे पाटिल ने यह जानकारी दी। उनका कहना था कि सभी थानों को बराबर मनुष्यबल देने के बजाय असली काम के बोझ के हिसाब से संसाधन बांटे जाने चाहिए।
उन्होंने एक उदाहरण भी दिया। हुड़केश्वर थाने की सीमा में 112 पर हर महीने करीब 683 कॉल आती हैं, जबकि बजाजनगर में यह संख्या करीब 110 है। ऐसे में दोनों थानों को एक जैसा मनुष्यबल देना ठीक नहीं होगा।
सीपी के मुताबिक नागपुर जिले की भौगोलिक स्थिति और अपराध के स्वरूप को देखते हुए पुलिसिंग को नए सिरे से खड़ा किया जा रहा है। मुंबई की तर्ज पर शहरी पुलिसिंग के अलग-अलग काम निरीक्षक, द्वितीय निरीक्षक और सहायक निरीक्षक के स्तर पर बांटने की योजना है, ताकि कानून-व्यवस्था के साथ जांच पर भी पूरा ध्यान दिया जा सके।
पुलिसकर्मियों की पढ़ाई और हुनर के हिसाब से उन्हें काम सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आर्थिक अपराध शाखा में वाणिज्य की पृष्ठभूमि वाले कर्मचारियों को तरजीह मिलेगी। साइबर अपराध की जांच में कंप्यूटर साइंस और बीसीए पढ़े कर्मियों को प्राथमिकता दी जाएगी। जोर इस पर रहेगा कि कर्मचारी अपने क्षेत्र में काम करते हुए विशेषज्ञ बनें।
महिला सुरक्षा के लिए महिला अधिकारियों की अगुवाई में 12 निर्भया दस्ते काम पर लगाए गए हैं। व्यस्त थानों में जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त मनुष्यबल देने की भी योजना है।
सेंधमारी और वाहन चोरी की घटनाओं का विश्लेषण करने पर पता चला कि रात 3 से सुबह 5 बजे के बीच अपराधी ज्यादा सक्रिय रहते हैं। इसलिए इस वक्त गश्त को और असरदार बनाया जाएगा। रिहायशी इलाकों में पुलिस सहायता समूह बनाकर स्थानीय सुरक्षा रक्षकों को भी जोड़ा जाएगा।
थाने के स्तर पर वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के साथ अपराध पुलिस निरीक्षक और पुलिस उपनिरीक्षक की जिम्मेदारियां तय की जाएंगी, जिससे गश्त और जांच अलग-अलग स्तरों पर मजबूत हो।
बीट पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए शहर की 130 गश्ती टीमों पर मोबाइल ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जा रहे हैं। इससे टीमों की गतिविधियों और संबंधित इलाके में पुलिस की असल मौजूदगी पर नजर रखी जा सकेगी। अपराध की जमीनी जानकारी जुटाने में बीट मार्शल की भूमिका अहम है, इसलिए इस व्यवस्था को और सक्षम बनाया जा रहा है।