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17:58 IST

नागपुर में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए 7,900 आवेदन अटके, तीन-चार महीने का इंतजार

मनपा और जिला स्वास्थ्य विभाग के पास करीब 7,900 आवेदन लंबित हैं, कई लोग तीन से चार महीने से प्रमाणपत्र का इंतजार कर रहे हैं।

नागपुर में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए 7,900 आवेदन अटके, तीन-चार महीने का इंतजार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर में जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाना अब लोगों के लिए सिरदर्द बन गया है। पहले आवेदन करने के बाद ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता था, लेकिन अब बड़ी संख्या में आवेदन अटके पड़े हैं। कई लोगों को प्रमाणपत्र हाथ में आने तक तीन से चार महीने रुकना पड़ रहा है।

मनपा और जिला स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के करीब 7,900 आवेदन लंबित बताए जा रहे हैं। इनमें से जिला स्तर पर करीब 3,400 आवेदन हैं। मनपा मुख्यालय में जून से अब तक 4,500 से ज्यादा आवेदन पेंडिंग पड़े हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अटके हुए मामलों में ज्यादातर वर्ष 2016 से पहले के जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड के हैं।

सबसे बड़ी अड़चन सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) का एक अकेला लॉगिन है। 2016 से पहले के रिकॉर्ड की प्रक्रिया के लिए मनपा मुख्यालय में स्वास्थ्य अधिकारी के पास फिलहाल सिर्फ एक सीआरएस लॉगिन है। इसी वजह से आवेदनों की जांच, मंजूरी और प्रमाणपत्र जारी करने का काम धीमा पड़ गया है।

भारतीय महापंजीयक (रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया) कार्यालय ने 8 जून 2026 को एक आदेश जारी किया था। इसके बाद 2016 से पहले के रिकॉर्ड के लिए जिला स्तर पर मंजूरी जरूरी कर दी गई। तभी से लंबित आवेदनों की संख्या लगातार बढ़ती गई।

बढ़ती दिक्कत को देखते हुए मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर ने अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा है कि वे भारतीय महापंजीयक कार्यालय को पत्र भेजकर अतिरिक्त सीआरएस लॉगिन की मांग करें। साथ ही लंबित आवेदनों का निपटारा तेज करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि लोगों को जल्द प्रमाणपत्र मिल सके।

मनपा के एक अधिकारी के अनुसार, अतिरिक्त सीआरएस लॉगिन की मांग करीब दो महीने पहले ही राज्य के जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिकारियों से की गई थी। लेकिन अब तक इसका कोई जवाब नहीं आया है।

मनपा के पास हर महीने जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के करीब 1,500 से 2,000 आवेदन आते हैं। मनपा के पास 1910 से अब तक का जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड मौजूद है। 1910 से 2015 तक का पुराना रिकॉर्ड मनपा मुख्यालय में रखा गया है। पुराने रिकॉर्ड के लिए सिर्फ नागपुर के लोग ही नहीं, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों के लोग भी मनपा में आवेदन करते हैं।

वर्ष 2016 और उसके बाद के रिकॉर्ड के प्रमाणपत्र मनपा के जोनल कार्यालयों से जारी होते हैं। 2016 से पहले के रिकॉर्ड की प्रक्रिया जिला स्तर पर होती है, इसलिए इन आवेदनों के निपटारे में ज्यादा वक्त लग रहा है।

जिला स्वास्थ्य विभाग पर भी दबाव बढ़ा है। उसे मनपा, 29 नगर परिषदों और नगर पंचायतों, एक कैंटोनमेंट बोर्ड और 761 ग्राम पंचायतों और गांवों से रोजाना करीब 400 आवेदन मिलते हैं। जिला स्तर का यही सीआरएस लॉगिन 2016 से पहले के पंजीकरण के अलावा विलंबित पंजीकरण, रजिस्ट्रार के मोबाइल नंबर अपडेट करने और आधार प्रमाणीकरण जैसे कामों में भी इस्तेमाल होता है। एक ही लॉगिन पर इतने काम होने से बोझ और बढ़ गया है।

अधिकारियों के अनुसार, जिला स्तर पर रोज करीब 400 आवेदन आते हैं, पर लगभग 100 की ही प्रक्रिया पूरी हो पाती है। इसी वजह से लंबित आवेदनों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।

जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र कई सरकारी और कानूनी कामों के लिए जरूरी दस्तावेज हैं। इनके मिलने में महीनों की देरी से लोगों के दूसरे काम भी अटक रहे हैं। अब नागरिकों की नजर इस पर है कि अतिरिक्त सीआरएस लॉगिन कब मिलता है और अटके आवेदन कब तक निपटते हैं।

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