गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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भाजपा के मोर्चे ने किया शहर का ट्रैफिक 'जाम'

जुर्म PT24 टीम

तीन घंटे सड़कों पर हाहाकार, एम्बुलेस तक फंसी, गलियों में भी लगा वाहनों का तांता

नागपुर.

भाजपा के 'संविधान बचाओ, अराजकता हटाओ' मोर्चे ने गुरुवार शाम शहर की यातायात व्यवस्था का ऐसा सत्यानाश किया कि करीब तीन घंटे तक पूरा नागपुर जाम से जूझता रहा. दीपावली की खरीदारी के लिए घरों से निकले हजारों नागरिक सड़कों पर फंसकर रह गए. हालात इतने बदतर हो गए कि मुख्य सड़कों के साथ ही धंतोली और सीताबर्डी की संकरी गलियों में भी वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. यहां तक कि अस्पताल जाने वाली एंबुलेंस भी जाम में फंसी नजर आईं.

भाजपा की ओर से यशवंत स्टेडियम से संविधान चौक तक मोर्चा निकाला गया था. इसके मद्देनजर पुलिस ने दोपहर 4 बजे से ही मार्च के तय रूट में आनेवाले प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्ट कर दिया था. वेरायटी चौक, पंचशील चौक और लोकमत चौक की ओर आने वाले वाहनों को दूसरे रास्तों पर मोड़ा जा रहा था. शाम 5 बजे जैसे ही मोर्चा सड़कों पर उतरा, यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई. लोकमत चौक से साई मंदिर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. वर्धा रोड से अजनी चौक की ओर उतरने वाला डबल डेकर पुल भी जाम की चपेट में आ गया. पश्चिम नागपुर से दक्षिण नागपुर की ओर जाने वाले वाहन चालक भी घंटों फंसे रहे. वेरायटी चौक, झांसी रानी चौक, पंचशील चौक और संविधान चौक के बीच पड़ने वाले लगभग सभी मार्गों पर वाहनों की भीड़ जमा हो गई. धंतोली पुलिस स्टेशन से लेकर इमामबाड़ा के अशोक चौक तक वाहन रेंगते रहे. जाम से बचने के लिए वाहन चालकों ने संकरी गलियों का रुख किया तो वहां भी रास्ते बंद जैसे हालात बन गए. धंतोली-सीताबर्डी की गलियों में पैदल चलना भी मुश्किल हो गया था.

धनतेरस से पहले नागरिकों की फजीहत

धनतेरस से ठीक एक दिन पहले हुए इस राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन ने दीपावली की खरीदारी के लिए निकले नागरिकों का पूरा समय सड़क पर बर्बाद कर दिया. बाजारों में पहुंचने की उम्मीद लेकर निकले लोग घंटों जाम में फंसे रहे. एम्बुलेंस तक के फंसने से आपातकालीन सेवाओं पर भी सवाल खड़े हुए. मोर्चे के राजनीतिक संदेश से ज्यादा उसकी वजह से पैदा हुई यातायात अव्यवस्था चर्चा का विषय बन गई. त्योहार के ठीक पहले हुई इस परेशानी से नागरिकों में भारी नाराजगी है. सवाल यह है कि राजनीतिक आयोजनों के दौरान आम नागरिकों की सुविधा और आपातकालीन सेवाओं को सुचारु रखने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है. कुछ समय से चरमराई यातायात को लेकर नागरिकों में तीव्र रोष है.

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