सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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11:12 IST

नागपुर में 15 दिन में डेंगू के 62 नए मरीज, जनवरी से अब तक 162 केस

नागपुर महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक शहर में जनवरी से अब तक डेंगू के 162 केस दर्ज हुए हैं, इनमें 62 पिछले 15 दिन में आए।

नागपुर में 15 दिन में डेंगू के 62 नए मरीज, जनवरी से अब तक 162 केस तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर में डेंगू के मामले फिर तेजी से बढ़ रहे हैं। शहर में सिर्फ 15 दिन में डेंगू के 62 केस दर्ज हुए हैं, जिससे सेहत को लेकर चिंता गहरा गई है। बढ़ता तापमान, कूलर का ज्यादा इस्तेमाल, घरों में बर्तनों में जमा पानी और निर्माण स्थलों पर रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने के लिए माहौल बना रहे हैं। इससे लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।

नागपुर महानगरपालिका (NMC) के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जनवरी से अब तक शहर में डेंगू के 162 केस सामने आए हैं। हालांकि असल आंकड़ा इससे ज्यादा हो सकता है, क्योंकि सरकारी आंकड़ों में प्राइवेट अस्पतालों, इंदिरा गांधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (मेयो) और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) में इलाज करा रहे मरीजों की पूरी गिनती शायद शामिल नहीं है।

केस बढ़ने से मच्छर नियंत्रण, बचाव के उपाय और लोगों में जागरूकता को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं। मौसम बदलने से कूलर चलने लगे हैं और रिहायशी इलाकों के साथ निर्माण स्थलों पर पानी जमा होने की गुंजाइश भी बढ़ गई है।

तापमान चढ़ने के साथ कई घरों में कूलर चलने लगे हैं। जिन कूलरों की नियमित सफाई नहीं होती या जिनमें पानी लंबे समय तक भरा रहता है, वे डेंगू फैलाने वाले मच्छरों का ठिकाना बन सकते हैं। छत की टंकियों, बाल्टियों, गमलों, फेंके हुए डिब्बों, पुराने टायरों और दूसरे बर्तनों में जमा पानी से भी ऐसा ही खतरा है। निर्माण स्थलों पर रुका पानी भी मच्छर पनपने की जगह हो सकता है, इसलिए वहां नियमित जांच और जमा पानी हटाना जरूरी बताया गया है।

लोगों से कहा गया है कि घर के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर की नियमित सफाई, पानी के बर्तनों को ढककर रखना, कचरे का सही निपटारा और आसपास पानी जमा न होने देना अहम बचाव के उपायों में गिने गए हैं। पूरी बांह के कपड़े पहनने, जरूरत पर मच्छर भगाने वाली चीजें इस्तेमाल करने और खिड़कियों पर जाली लगाने की भी बात कही गई है।

डॉक्टर भी खतरे के संकेत पहचानने और वक्त पर इलाज लेने पर जोर दे रहे हैं। डेंगू पॉजिटिव हर मरीज को भर्ती करने की जरूरत नहीं होती, लेकिन पेचीदगियां पकड़ने के लिए बारीकी से निगरानी जरूरी है। चिंता की बात यह है कि कुछ मरीजों में बुखार उतरने के बाद भी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए मरीज और उनके घरवाले सिर्फ इसलिए बेफिक्र न हों कि बुखार कम हो गया है।

GMCH के डॉ. मिलिंद व्यवहारे ने गंभीर डेंगू के लक्षण पहचानने की अहमियत बताई। उन्होंने कहा, "हर डेंगू पॉजिटिव मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं होती। लेकिन पेट में तेज दर्द, बार-बार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, मल में खून, सांस लेने में तकलीफ, पेशाब कम होना, चक्कर आना या बहुत ज्यादा कमजोरी गंभीर चेतावनी के संकेत हैं। ऐसे लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इन लक्षणों के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।"

बढ़ते केस बताते हैं कि महानगरपालिका और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। मच्छर पनपने की जगहों की नियमित जांच, जमा पानी हटाना और लगातार जागरूकता अभियान संक्रमण रोकने के लिए जरूरी बताए गए हैं। केस और बढ़ने का इंतजार किए बिना लोगों को अभी से बचाव शुरू करना चाहिए।

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