मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:40 IST

प्रभादेवी की शाकंबरी देवी का मंदिर: 300 साल पुराना इतिहास और मूर्ति की कथा

प्रभादेवी का शाकंबरी देवी मंदिर 300 साल से ज़्यादा पुराना बताया जाता है, 1715 में हुई थी पुनर्प्रतिष्ठा।

प्रभादेवी की शाकंबरी देवी का मंदिर: 300 साल पुराना इतिहास और मूर्ति की कथा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मुंबई का नाम आते ही ज़्यादातर लोगों के सामने इमारतें, भागदौड़ और आधुनिक रहन-सहन की तस्वीर आती है। लेकिन शहर के बीच के हिस्से में प्रभादेवी का एक मंदिर है, जो सैकड़ों साल का इतिहास संभाले हुए है। प्रभादेवी में शाकंबरी देवी का यह मंदिर 300 साल से ज़्यादा पुराना बताया जाता है। इस मंदिर के पीछे कई मशहूर कथाएं हैं। कहा जाता है कि मंदिर की पुनर्प्रतिष्ठा 1715 में हुई थी।

बारहवीं सदी में देवगिरी के यादव राजा बिंबदेव, या गुजरात के राजा बिंब, की यह कुलस्वामिनी थीं। उस ज़माने में देवी को शाकंबरी के नाम से जाना जाता था। राजा बिंब ने इस इलाके में अपना राज्य कायम किया और इस मुख्य देवी को यहां लेकर आए थे।

जब मुगल हमलावरों ने इस क्षेत्र पर हमले शुरू किए, तब देवी की मूर्ति को महफूज़ रखने और उसकी बेअदबी से बचाने के लिए उसे हटा दिया गया। पहले उसे माहिम की खाड़ी में रखा गया, फिर चमत्कारी ढंग से मंदिर के पास के एक कुएं में छिपा दिया गया।

आगे की कथा यह है कि मुंबई के मूल निवासी पाठारे प्रभू समाज के शाम नायक नाम के एक भक्त के सपने में प्रभा देवी आईं। देवी ने उनसे कहा कि कुएं से मेरी मूर्ति बाहर निकालो और मंदिर फिर से बनवाओ। सपने के इसी आदेश के मुताबिक 1715 में मंदिर की दोबारा प्रतिष्ठापना की गई। इस करीब 300 साल पुराने मंदिर से ही जगह का नाम प्रभादेवी पड़ा। कुछ ऐतिहासिक संदर्भों के मुताबिक मंदिर में रखी देवी की मूर्ति का इतिहास मंदिर की स्थापना से भी पुराना है। उपलब्ध जानकारी के हिसाब से मौजूदा मंदिर करीब 300 साल पहले का ही माना जाता है।

आज प्रभादेवी का इलाका ऊंची इमारतों, सड़कों और आधुनिक मुंबई का हिस्सा दिखता है। मगर पहले मुंबई का बड़ा हिस्सा दलदल, खाड़ी और नारियल के पेड़ों से भरा हुआ था। शहर के फैलाव के साथ कई इलाकों की ज़मीन भराव करके विकसित की गई, और आगे चलकर दादर, प्रभादेवी और एलफिन्स्टन जैसे इलाकों की शहरी पहचान बनी।

प्रभादेवी की खासियत यह है कि यहां पुरानी धार्मिक परंपरा और आधुनिक मुंबई एक-दूसरे के बिल्कुल करीब दिखते हैं। एक तरफ देवी की सैकड़ों साल पुरानी परंपरा है, तो दूसरी तरफ दो सदी का इतिहास रखने वाला सिद्धिविनायक मंदिर है, और उसके चारों ओर धीरे-धीरे विकसित हुई आधुनिक मुंबई। इसी वजह से प्रभादेवी को एक अलग सांस्कृतिक अहमियत मिली है।

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