पंढरपुर: विठ्ठल-रुक्मिणी मूर्तियों पर केमिकल लेपन के लिए 23 से 25 सितंबर तक दर्शन प्रभावित
कोर्ट में याचिका की वजह से तीन महीने अटका काम अब शुरू होगा, मंदिर समिति ने बताया शेड्यूल
पंढरपुर जाने का प्लान बना रहे भक्तों के लिए एक जरूरी खबर है। श्री क्षेत्र पंढरपुर में विठ्ठल-रुक्मिणी की मूर्तियों पर होने वाली रासायनिक लेपन प्रक्रिया की तारीख अब पक्की हो गई है। भारतीय पुरातत्व विभाग यानी एएसआई 23 से 25 सितंबर के बीच यह काम पूरा करेगा। मंदिर समिति के कार्यकारी अधिकारी श्रीकांत यादव ने खुद इसकी आधिकारिक जानकारी दी है।
यह काम पिछले तीन महीने से अटका हुआ था। दरअसल कुछ भक्तों ने इस लेपन प्रक्रिया के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखल कर दी थी, जिसकी वजह से काम रुका रहा। अब मुंबई हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच ने इस प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। 22 सितंबर को शेजारती पूरी होते ही एएसआई अपना काम शुरू कर देगा।
मूर्तियों की झीज क्यों हो रही है, यह भी समझने लायक बात है। पंढरपुर में हर साल करीब 2.5 से 3 करोड़ भक्त विठुराया के चरण छूकर दर्शन करते हैं। इतने ज्यादा भक्तों के स्पर्श, रोज होने वाले अभिषेक, और मौसम में बदलाव तथा नमी की वजह से मूर्ति के पत्थर की काफी झीज हो गई है। फिलहाल विठ्ठल की मूर्ति के पैर में एक गड्ढा पड़ गया है और पैर पूरी तरह घिस गए हैं। इसके अलावा भी मूर्ति में कई जगह तुरंत लेपन की जरूरत बन गई है। पत्थर की झीज रोकने, दरारें भरने और मूर्ति को लंबे समय तक बचाए रखने के लिए यह लेपन बहुत जरूरी माना जा रहा है। मंदिर प्रशासन के हाथ में आने के बाद सबसे पहले 1988 में मूर्ति पर लेपन किया गया था। उसके बाद अब तक चार बार यह प्रक्रिया करनी पड़ी है। परंपरा में इसे वज्रलेप कहा जाता है, लेकिन आजकल पुरातत्व विभाग आधुनिक और मान्यता प्राप्त रासायनिक लेप का इस्तेमाल करता है।
एएसआई के रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर और केमिस्ट विलास पुनीराज के मुताबिक, इस लेप में मुख्य रूप से एपॉक्सी रेजिन, पत्थर का पाउडर और पानी न घुसने देने वाला सिलिकॉन बेस्ड मटेरियल इस्तेमाल होता है। यह वही मान्यता प्राप्त तरीका है जो पुरातत्व विभाग पूरे देश में अपनाता है। यह केमिकल पूरी तरह हर्बल यानी नैचुरल और अधिकृत है, इसलिए मूर्ति को कोई नुकसान नहीं होता।
यह लेप कितने साल टिकेगा, यह भक्तों के स्पर्श, नियमित अभिषेक और मौसम में बदलाव पर निर्भर करता है। पंढरपुर के पुराने अनुभव के हिसाब से यह सुरक्षा कवच करीब 5 से 6 साल ठीक-ठाक टिकता है। इसके बाद मूर्ति की फिर झीज होने पर दोबारा लेपन प्रक्रिया करनी पड़ती है।
22 सितंबर को शेजारती के बाद काम शुरू होगा और 23 से 25 सितंबर के बीच लेपन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इन दिनों दर्शन के समय में बदलाव रहेगा, इसलिए भक्तों को पंढरपुर जाने का प्लान बनाते वक्त इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए।