नागपुर के मुंडले धरमपेठ कॉलेज में स्वागत समारोह, छात्र परिषद ने संभाला कार्यभार
आर. एस. मुंडले धरमपेठ कला व वाणिज्य महाविद्यालय में 2026-27 के स्वागत और पदग्रहण समारोह में पुरानी यादें ताजा हुईं और विद्यार्थियों ने अपने हुनर दिखाए।
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नागपुर के आर. एस. मुंडले धरमपेठ कला व वाणिज्य महाविद्यालय में शैक्षणिक वर्ष 2026-27 का स्वागत समारोह और विद्यार्थी पदग्रहण समारोह हुआ। पुरानी यादों, बच्चों के हुनर और नए नेतृत्व की शुरुआत, इन तीनों के माहौल में पूरा कार्यक्रम बड़े जोश के साथ चला। टाइम्स ऑफ इंडिया के वरिष्ठ पत्रकार वैभव गांजापुरे इसमें परीक्षक के तौर पर मौजूद थे। विद्यार्थियों की प्रतिभा और उनके संघर्ष भरे सफर से वे काफी प्रभावित हुए और उनके लिए भी यह समारोह भुलाया न जा सकने वाला रहा।
कॉलेज के परिसर में कदम रखते ही वैभव गांजापुरे को स्कूल के दिनों की कई यादें ताजा हो गईं। उनके स्कूल और इस कॉलेज का परिसर एक ही है, इसलिए यहां दोबारा आना उनके लिए भावुक करने वाला अनुभव रहा। एक तरफ पुरानी यादों की खुशबू थी और दूसरी तरफ नई पीढ़ी का उत्साह, इसी वजह से कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अलग-अलग कलाओं की प्रस्तुति दी और वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया। बच्चों का आत्मविश्वास, उनकी रचनात्मकता, पेश करने का अलग अंदाज और मेहनत साफ दिखाई दी। हर प्रस्तुति में कुछ न कुछ खास था, इसलिए विजेताओं को चुनना परीक्षकों के लिए भी आसान नहीं रहा।
वैभव गांजापुरे ने सह-परीक्षक सोनल लोहित के साथ मिलकर विजेताओं का चयन किया। हर विद्यार्थी की कला में अपनी अलग बात और गुणवत्ता थी, इसलिए इस चयन में कई बातों को ध्यान में रखना पड़ा।
कार्यक्रम की एक और बात ने खास तौर पर ध्यान खींचा। कई विद्यार्थी आर्थिक तंगी के बीच पढ़ाई कर रहे हैं। पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए कुछ बच्चे पार्ट-टाइम काम भी करते हैं। काम और पढ़ाई के बीच तालमेल बिठाकर अपने सपनों की तरफ बढ़ रहे इन बच्चों की जिद प्रेरणा देने वाली है।
इन विद्यार्थियों ने दिखा दिया कि हालात कितने भी मुश्किल हों, मेहनत, आत्मविश्वास और सही मौके के दम पर आगे बढ़ा जा सकता है। इनाम जीतना कामयाबी का एक रूप जरूर है, लेकिन अपने भीतर की कला को पहचानना, उसे भरोसे के साथ पेश करना और नए मौके अपनाना भी उतना ही जरूरी है।
समारोह में विद्यार्थी पदग्रहण कार्यक्रम भी उत्साह के साथ हुआ। नए चुने गए विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारी संभाली। यह सिर्फ कार्यभार लेने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि नेतृत्व के गुण विकसित करने और कॉलेज की तरक्की में योगदान देने की शुरुआत है।
नेतृत्व का मतलब सिर्फ कोई पद संभालना नहीं है। इसका मतलब है जिम्मेदारी से काम करना, साथियों को साथ लेकर चलना और संस्था के विकास के लिए सकारात्मक भूमिका निभाना। कार्यक्रम में यह उम्मीद जताई गई कि विद्यार्थी इस मौके का इस्तेमाल अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए करेंगे।
इस कार्यक्रम में बुलाए जाने के लिए वैभव गांजापुरे ने कॉलेज की प्राचार्य प्रा. डॉ. मंजुश्री सरदेशपांडे का आभार माना। उन्होंने न्योता देने वाले सभी शिक्षकों का भी शुक्रिया अदा किया, खासकर स्मिता कळिकर का। कार्यक्रम को कामयाब बनाने के लिए मेहनत करने वाले पूरे कॉलेज परिवार को उन्होंने बधाई दी।
कॉलेज से लौटते वक्त मन में पुरानी यादों की खुशबू थी और नई पीढ़ी की गुणवत्ता पर गर्व भी, यह भावना वैभव गांजापुरे ने जाहिर की। विद्यार्थियों के भीतर छिपे हुनर को सही मंच और हौसला मिले तो उन्हें अपनी क्षमता साबित करने का मौका मिलता है। ऐसे आयोजनों से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है, नेतृत्व के गुण निखरते हैं और आगे के सफर के लिए नई प्रेरणा मिलती है।
आर. एस. मुंडले धरमपेठ कला व वाणिज्य महाविद्यालय का यह समारोह पुरानी यादों, आज की प्रतिभा और आने वाले कल के सपनों का सुंदर संगम बन गया। उम्मीद यही जताई गई कि विद्यार्थी ज्ञान, मेहनत, नेतृत्व और आत्मविश्वास के बल पर अपने सपने पूरे करें।
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