शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

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नागपुर के अदासा कोल यार्ड में आग की घटनाएं, ढाई लाख टन कोयले के स्टॉक पर सवाल

नागपुर के अदासा कोल यार्ड में आग की घटनाएं, ढाई लाख टन कोयले के स्टॉक पर सवाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के सावनेर सब-एरिया के अदासा कोल यार्ड में आग और पुराने कोयले के कथित मिश्रण को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग उठी है।

नागपुर जिले में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के सावनेर सब-एरिया के तहत आने वाले अदासा यूजी टू ओसी कोल यार्ड में आग की घटनाओं ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि कोयले के स्टॉक को कैसे संभाला जा रहा है और सरकारी संपत्ति कितनी सुरक्षित है।

आरोप है कि पिछले तीन महीनों के दौरान कोल यार्ड-1 में आग लगने की घटनाएं हुई हैं। वहीं कोल यार्ड-2 के बारे में कहा जा रहा है कि वहां पुराने, आग से प्रभावित कोयले को नए स्टॉक में मिला दिया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी बताई गई है।

आंकड़ों की बात करें तो करीब 2.5 लाख मीट्रिक टन कोयले का स्टॉक बताया जा रहा है। इसमें से लगभग 1 लाख मीट्रिक टन कोयला प्रभावित होने का अनुमान जताया गया है। हालांकि ये आंकड़े अनुमान ही हैं, और पुराने कोयले के कथित मिश्रण की भी आधिकारिक पुष्टि होना जरूरी है।

जांच में क्या-क्या देखा जाए, इस पर भी बात हुई है। आग लगने का कारण क्या था, असली नुकसान कितना हुआ, स्टॉक रिकॉर्ड में क्या दर्ज है और जिम्मेदार अधिकारियों की क्या भूमिका रही, यह सब साफ होना चाहिए।

कोल यार्ड-1 के मामले में मांग है कि आग की घटनाएं कब-कब हुईं, कितना नुकसान हुआ और उसके बाद सुरक्षा व्यवस्था में क्या सुधार किए गए, इसकी जांच हो। कोल यार्ड-2 में पुराने और नए कोयले की मात्रा, गुणवत्ता रिपोर्ट, वजन पर्चियों और स्टॉक रजिस्टर का मिलान किया जाए। यह भी साफ हो कि आग से प्रभावित कोयले को अलग रखने और उसकी गुणवत्ता जांचने के तय नियमों का पालन हुआ या नहीं।

जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया गया है। अदासा प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष तकनीकी जांच होनी चाहिए। अगर सुरक्षा में लापरवाही, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या नियमों के उल्लंघन के सबूत मिलते हैं, तो नियम के मुताबिक कार्रवाई की जाए। सरकारी संपत्ति को हुए असली नुकसान का आकलन भी कराया जाए।

कोयले की गुणवत्ता, ग्रेड और स्टॉक प्रबंधन पर पहले से सवाल उठ रहे हैं, और ऐसे में आग की घटनाओं ने शक और बढ़ा दिया है। फिर भी किसी साजिश या सबूत मिटाने के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए अटकलों की जगह निष्पक्ष जांच, पारदर्शी रिपोर्ट और जवाबदेही तय करने की जरूरत है।

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