धनत्रयोदशी पर शुक्र प्रदोष व्रत का संयोग, 6 नवंबर को शाम 5:33 से 8:09 तक पूजा का समय
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नवंबर का पहला प्रदोष व्रत धनत्रयोदशी के दिन शुक्रवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। पूजा का समय और विधि यहां दी गई है।
नवंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत इस बार धनत्रयोदशी के दिन आ रहा है। उस दिन शुक्रवार है, इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा का भी खास संयोग बन रहा है। इसी वजह से शिव का आशीर्वाद पाने के लिए धनत्रयोदशी को एक खास मौका माना जा रहा है।
प्रदोष व्रत का दिन महादेव को समर्पित होता है। यह व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष, दोनों की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। पंचांग के मुताबिक कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे खत्म होगी। चूंकि त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में 6 नवंबर को पड़ रही है, इसलिए व्रत उसी दिन रखा जाएगा।
अब पूजा के समय की बात। 6 नवंबर को प्रदोष व्रत की पूजा का समय शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक है, यानी कुल 2 घंटे 37 मिनट। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:52 से 5:44 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 से दोपहर 12:26 बजे तक है, जबकि निशिता मुहूर्त रात 11:39 से 12:31 बजे तक रहेगा।
इस साल धनत्रयोदशी और शुक्र प्रदोष व्रत एक ही दिन पड़ रहे हैं। इस मौके पर देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा के साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाएगी।
पूजा की विधि इस तरह बताई गई है। प्रदोष व्रत के दिन सुबह नहा-धोकर साफ कपड़े पहनें और भगवान शिव के सामने व्रत रखने का संकल्प लें। शाम को, प्रदोष काल में, शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और फूल चढ़ाएं। धूप और दीये जलाएं, शिव मंत्रों का जाप करें और व्रत कथा पढ़ें या सुनें। आखिर में भगवान शिव की आरती करें और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। ऐसा माना जाता है कि श्रद्धा के साथ उपवास रखने से जीवन की परेशानियों से राहत मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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