शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
09:18 IST

नागपुर हाईकोर्ट ने निर्मल उज्ज्वल के संस्थापक पर चल रही अवमानना की कार्रवाई बंद की

बिना शर्त माफी के बाद 5 लाख रुपये की लागत भी माफ; 2025 के आदेश का पालन अब भी बाकी, 4 नवंबर को अगली सुनवाई।

नागपुर हाईकोर्ट ने निर्मल उज्ज्वल के संस्थापक पर चल रही अवमानना की कार्रवाई बंद की तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के संस्थापक और सचिव प्रमोद नत्थूजी मानमोडे के खिलाफ चल रही स्वतः संज्ञान वाली आपराधिक अवमानना की कार्रवाई बंद कर दी है। मानमोडे ने जस्टिस अनिल पानसरे और जस्टिस निवेदिता मेहता की डिवीजन बेंच के सामने बिना शर्त माफी मांगी थी, जिसके बाद यह फैसला हुआ।

हाईकोर्ट ने मानमोडे पर लगाई गई 5 लाख रुपये की लागत भी माफ कर दी है। यह लागत सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उन पर लगाई गई थी।

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। मानमोडे ने हाईकोर्ट के 1 सितंबर के आदेश को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन जजों की बेंच ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा था कि वह अवमानना की कार्रवाई बंद करने, लागत माफ करने और ऐसी टिप्पणियां हटाने पर विचार करे, जिन्हें मानमोडे के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी समझा जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों पर अमल करते हुए हाईकोर्ट ने अपना 1 सितंबर का आदेश वापस ले लिया। साथ ही रजिस्ट्री को कहा गया कि जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रकम मानमोडे को लौटा दी जाए।

डिवीजन बेंच ने उम्मीद जताई कि मानमोडे हाईकोर्ट के 29 अप्रैल 2025 के फैसले का जल्द से जल्द पालन करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को तय की गई है।

अवमानना की यह कार्रवाई 29 अप्रैल 2025 के उसी फैसले के कथित पालन न होने से निकली थी। उस फैसले में हाईकोर्ट ने सोसाइटी को निर्देश दिया था कि 24 मीटर चौड़ी डेवलपमेंट प्लान रोड पर बने सब-स्टेशन, ट्रांसफॉर्मर, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और दूसरे ढांचे हटाए जाएं।

अवमानना का मामला भले ही बंद हो गया हो, लेकिन कोर्ट इस पर नजर रखेगी कि पहले के फैसले का पालन कैसे हो रहा है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे