मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:41 IST

नंदनवन में निर्मल उज्ज्वल के दफ्तर पर जमा रकम मांगने पहुंची जमाकर्ताओं की भीड़

मैच्योरिटी के बाद भी भुगतान न मिलने से नाराज जमाकर्ताओं ने सोमवार को नागपुर में संस्था के मुख्यालय में हंगामा किया।

नंदनवन में निर्मल उज्ज्वल के दफ्तर पर जमा रकम मांगने पहुंची जमाकर्ताओं की भीड़
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर के नंदनवन में 'निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड' के मुख्यालय में सोमवार को माहौल तनावपूर्ण हो गया। बड़ी संख्या में जमाकर्ता और खाताधारक अपनी जमा रकम वापस मांगने दफ्तर पहुंच गए थे। मैच्योरिटी पूरी हो चुकी है, फिर भी पैसे नहीं मिले, इसी बात से नाराज लोगों ने दफ्तर परिसर में हंगामा किया। भीड़ बढ़ी तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नंदनवन और कोतवाली थाने से पुलिस बल बुलाया गया।

सोमवार सुबह संस्था के मुख्य कार्यालय और संस्थापक सचिव प्रमोद मानमोड़े के कक्ष के बाहर पुलिसवाले दिखाई दे रहे थे। पुलिस बंदोबस्त की खबर फैली तो अफवाह उड़ गई कि संस्था पर आयकर विभाग का छापा पड़ा है। इसके बाद अपने पैसों की फिक्र में बहुत से खाताधारक दफ्तर की ओर आने लगे।

बाद में साफ किया गया कि दफ्तर में आयकर विभाग की कोई छापेमारी हुई ही नहीं थी। बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं के जमा होने और संभावित विवाद को देखते हुए एहतियात के तौर पर पुलिस बंदोबस्त लगाया गया था।

जमाकर्ता पिछले कई महीनों से शिकायत कर रहे हैं कि मैच्योरिटी पूरी होने के बावजूद उन्हें जमा रकम का भुगतान नहीं किया जा रहा। कुछ जमाकर्ताओं ने यह दावा भी किया है कि उनके चेक बाउंस हो गए।

इसी बीच जानकारी सामने आई कि संस्था में 51.70 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली स्थित सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसायटीज की ओर से लिक्विडेशन का नोटिस जारी किया गया है। इसके बाद जमाकर्ताओं की चिंता और बढ़ गई। उन्होंने सरकार और सहकारिता विभाग से मांग की है कि वे तुरंत दखल देकर उनकी जमा रकम वापस दिलवाएं।

बताया जाता है कि संस्था की 50 से अधिक शाखाओं में आम नागरिकों और व्यापारियों की बड़ी रकम जमा है। भुगतान को लेकर लंबे समय से बनी स्थिति की वजह से खाताधारकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

हाल ही में हुई संस्था की सालाना आमसभा में संस्थापक सचिव प्रमोद मानमोड़े ने हालात सामान्य करने के लिए 45 से 60 दिनों का वक्त मांगा था। जमाकर्ताओं का कहना है कि यह अवधि गुजर चुकी है, फिर भी भुगतान शुरू नहीं हुआ, इसलिए उनकी परेशानी बढ़ गई है।

जमाकर्ताओं और प्रबंधन के दावे अलग-अलग हैं। जमाकर्ताओं का आरोप है कि संस्था में जमा रकम के मुकाबले ऋण वितरण कम है और संस्था का पैसा कहीं और लगाया गया है। दूसरी ओर, संस्था प्रबंधन का दावा है कि उसके पास पर्याप्त संपत्ति है और जमाकर्ताओं की रकम सुरक्षित है। प्रबंधन के मुताबिक मौजूदा दिक्कत लिक्विडिटी की कमी की है और हालात सामान्य करने की कोशिश की जा रही है।

सोमवार को बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं के मुख्यालय पहुंचने से तनाव रहा। इस बीच पुलिस मौके पर तैनात रही और हालात पर नजर रखे रही।

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