संजीवन गोपालकृष्ण संस्था के स्कूलों में प्रशासक का सरकारी आदेश हाई कोर्ट में रद्द
नागपुर खंडपीठ ने कहा कि बिना सुनवाई का मौका दिए पारित आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
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नागपुर जिले की संजीवन गोपालकृष्ण संस्था को हाई कोर्ट से राहत मिली है। संस्था के स्कूलों पर प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर) बिठाने का जो आदेश राज्य सरकार ने दिया था, उसे न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने सुनवाई के बाद रद्द कर दिया।
अदालत ने साफ कहा कि यह आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करके पारित किया गया था, इसलिए कानून की नजर में यह टिक नहीं सकता। मामला संस्था की ओर से दायर रिट याचिका के जरिए हाई कोर्ट पहुंचा था।
याचिका में राज्य सरकार और अन्य के खिलाफ कहा गया था कि सरकार ने 4 सितंबर 2026 को सहायक संचालक को संस्था के स्कूलों पर प्रशासक नियुक्त कर दिया। आरोप यह था कि इससे पहले याचिकाकर्ता को अपनी बात रखने का कोई मौका ही नहीं दिया गया।
अपने आदेश में कोर्ट ने याद दिलाया कि 28 सितंबर 2026 को नोटिस जारी करते समय ही याचिकाकर्ता के वकील की यह दलील दर्ज कर ली गई थी कि प्रशासक वाला आदेश देने से पहले सुनवाई का अवसर नहीं मिला। अंतिम सुनवाई में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पी.पी. ठाकरे ने यही बात फिर दोहराई। उन्होंने कहा कि 4 सितंबर 2026 का आदेश रद्द होना चाहिए, क्योंकि वह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
कोर्ट के मुताबिक बहस के दौरान प्रतिवादियों ने भी इस बात से इनकार नहीं किया कि याचिकाकर्ता को सुनवाई का मौका नहीं मिला था। अदालत ने कहा कि यह पहलू मामले की जड़ से जुड़ा है, क्योंकि प्रशासक याचिकाकर्ता-प्रबंधन के चलाए जा रहे स्कूलों पर बिठाया गया है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने महाराष्ट्र राज्य सरकार का 4 सितंबर 2026 का आदेश रद्द कर दिया। साथ ही सरकार से कहा गया कि वह एजीपी की ओर से कोर्ट में पेश किए गए 21 सितंबर 2026 के पत्र के हिसाब से काम करे, और कोई भी आदेश पारित करने से पहले याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दे।
सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील पी.पी. पेंडके ने 21 सितंबर 2026 के पत्राचार की प्रति अदालत में रखी। यह पत्र मुंबई के वीजेएनटी, ओबीसी और एसबीसी कल्याण विभाग के डेस्क अधिकारी ने निदेशक को भेजा था।
पत्र में लिखा था कि 4 सितंबर 2026 के आदेश की जानकारी प्रतिवादी को दी गई थी। इसके अलावा याचिकाकर्ता-प्रबंधन के अध्यक्ष का 6 सितंबर 2026 का पत्र और उससे जुड़े दस्तावेज, तथा विधायक चरण सिंह ठाकुर का 9 सितंबर 2026 को जारी पत्र भी प्रतिवादी को आगे भेजे गए थे। पत्र के आखिर में कहा गया था कि आश्रम स्कूल कोड, सर्कुलर और जीआर समेत सभी जरूरी और लागू प्रावधानों की जांच के बाद सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाए।