नागपुर डिवीजन में महारेरा ने वसूले 9.65 करोड़ रुपये, सात प्रोजेक्ट के बकाये पर कार्रवाई
महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने नागपुर डिवीजन के सात प्रोजेक्ट में 11.05 करोड़ रुपये के बकाया मुआवजे में से 9.65 करोड़ रुपये वसूल किए।
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महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (महारेरा) ने नागपुर डिवीजन के सात प्रोजेक्ट में बकाया मुआवजे की रकम वसूल की है। इन प्रोजेक्ट में कुल 11.05 करोड़ रुपये बकाया थे, जिनमें से 9.65 करोड़ रुपये वसूल हो चुके हैं। यह वसूली 19 रिकवरी वारंट के तहत की गई, और इन मामलों में बकाया रकम अब चुका दी गई है।
नागपुर डिवीजन की कार्रवाई में सात प्रोजेक्ट को 19 वारंट के जरिए कवर किया गया। बकाया 11.05 करोड़ रुपये का था और अथॉरिटी ने उसमें से 9.65 करोड़ रुपये वसूले। जिन मामलों में यह वसूली की गई, उनमें अब कोई बकाया नहीं बचा है।
पूरे महाराष्ट्र की बात करें तो महारेरा ने घर खरीदारों के लिए करीब 369.45 करोड़ रुपये का मुआवजा वसूल किया है। पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक वसूली की दर करीब 45 फीसदी है। अथॉरिटी का दावा है कि मुआवजा वसूली के मामले में वह देश की सभी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी में पहले नंबर पर है।
मई 2017 में स्थापना के बाद से महारेरा ने 1,531 शिकायतों में कुल 1,037.86 करोड़ रुपये के रिकवरी ऑर्डर जारी किए हैं। इसमें से अब तक करीब 370 करोड़ रुपये वसूल हो चुके हैं।
साल 2017 से पिछले साल दिसंबर तक करीब 260 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी। चालू साल में इसके अलावा 110 करोड़ रुपये और वसूले गए, जिससे प्रभावित घर खरीदारों को राहत मिली है।
वसूली की पूरी प्रक्रिया में करीब 209 करोड़ रुपये पर कानूनी पाबंदियां बनी हुई हैं। इसमें से करीब 104.70 करोड़ रुपये के मामले नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में लंबित हैं, जबकि करीब 104.46 करोड़ रुपये के मामले महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉझिटर्स (MPID) एक्ट के तहत लंबित हैं।
ये आंकड़े बताते हैं कि मुआवजे के ऑर्डर पर अमल करवाना आसान नहीं है, और घर खरीदारों को उनकी रकम दिलाने के लिए लगातार कार्रवाई जरूरी है।