नागपुर में मकानों के दाम पांच साल में 63% तक बढ़े, मुंबई-बेंगलुरु से आगे निकला ग्रोथ रेट
CII-नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में नागपुर समेत 11 उभरते शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में तेज उछाल दर्ज, बड़े महानगरों से ज्यादा रफ्तार
नागपुर की रियल एस्टेट मार्केट में पिछले कुछ सालों में जो तेजी आई है, वो अब आंकड़ों में भी साफ दिखने लगी है। CII और नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के 11 उभरते शहरों में घरों की कीमतें 63% तक बढ़ गई हैं, और इस लिस्ट में नागपुर का नाम भी शामिल है।
इस लिस्ट में नागपुर के अलावा भोपाल, लखनऊ, जयपुर, इंदौर, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, अहमदाबाद, कोयंबटूर और देहरादून जैसे शहर भी हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन सभी शहरों में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दिलचस्प बात ये है कि यही तेजी मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े महानगरों में उतनी नहीं दिखी। रिपोर्ट कहती है कि इन तीनों महानगरों में पिछले पांच साल में घरों की कीमतें करीब 42% ही बढ़ीं, यानी नागपुर जैसे टियर-2 शहर इस मामले में इनसे भी आगे निकल गए।
अभी नागपुर में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी के रेट करीब 4,500 से 6,500 रुपए प्रति वर्गफुट के बीच बताए गए हैं। शहर में सड़क, रेलवे, मेट्रो, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसे कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट चल रहे हैं, और इन्हीं की वजह से रियल एस्टेट सेक्टर में हलचल बढ़ी है। कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ-साथ रोजगार और कारोबारी गतिविधियां भी बढ़ रही हैं, जिससे घरों की डिमांड को सहारा मिल रहा है।
अब टियर-2 शहरों में घर खरीदने वालों की सोच भी बदल गई है। पहले लोग यहां सिर्फ सस्ते घर के लिए आते थे, लेकिन अब बेहतर कनेक्टिविटी और मॉडर्न सुविधाओं की वजह से खरीदार बड़े घर और अच्छी लोकेशन के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार हैं। लोकेशन के अलावा स्कूल, अस्पताल, बाजार, ऑफिस तक पहुंच और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी चीजें भी अब घर खरीदने के फैसले में बड़ा रोल निभा रही हैं।
इसी बदलाव को देखते हुए बिल्डर भी अब इन शहरों में बड़े और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रहे हैं। नागपुर में कई बड़े डेवलपर्स के प्रोजेक्ट शुरू होने से रेजिडेंशियल और कमर्शियल, दोनों तरह की रियल एस्टेट गतिविधियां बढ़ी हैं।
नागपुर एयरपोर्ट से जुड़े डेवलपमेंट और शहर में बढ़ती कारोबारी गतिविधियों को भी इस सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है। आगे जैसे-जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होगा और रोजगार के मौके बढ़ेंगे, प्रॉपर्टी की डिमांड में और मजबूती आने की उम्मीद जताई जा रही है।