मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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मुरासू तूफान का असर: महाराष्ट्र के कई जिलों में अगले तीन दिन बारिश की चेतावनी

मुरासू तूफान का असर: महाराष्ट्र के कई जिलों में अगले तीन दिन बारिश की चेतावनी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

मौसम विभाग ने 3, 4 और 5 नवंबर को कोकण, पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ जिलों में बिजली कड़कने के साथ बारिश का अंदाज जताया है।

नवंबर शुरू होते ही महाराष्ट्र का मौसम अचानक करवट ले चुका है। राज्य के कई हिस्सों में ठंड का जोर कम हो गया है और तापमान ऊपर-नीचे हो रहा है। बंगाल की खाड़ी में बने मुरासू तीव्र चक्रवाती तूफान और अरब सागर में हवाओं के चक्राकार क्षेत्रों की वजह से राज्य के कुछ इलाकों में बारिश के हालात बन गए हैं।

मौसम विभाग ने 3, 4 और 5 नवंबर को अलग-अलग जिलों में बिजली की कड़क के साथ बारिश का अंदाज बताया है। कोकण, पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ जिलों के लिए बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

मंगलवार, 3 नवंबर को सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर, कोल्हापुर घाटमाथा, लातूर और नांदेड जिलों में बिजली कड़कने के साथ बारिश की चेतावनी है। रत्नागिरी, नाशिक घाटमाथा, नाशिक, पुणे घाटमाथा, पुणे, सातारा घाटमाथा, सातारा, सांगली, अहिल्यानगर, सोलापुर, बीड, धाराशिव, परभणी और हिंगोली में बिजली के साथ हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। कोल्हापुर, कोल्हापुर घाटमाथा और सिंधुदुर्ग के लिए यलो अलर्ट दिया गया है। गडचिरोली, चंद्रपुर, यवतमाल, नांदेड और लातूर में भी बादल गरजने के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। मराठवाड़ा के कई हिस्सों में हल्की बौछारें, बादल और तेज हवाएं चल सकती हैं।

बुधवार, 4 नवंबर को रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर घाटमाथा, सातारा घाटमाथा, कोल्हापुर, सातारा, सांगली, सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर, जालना, परभणी, हिंगोली, नांदेड और लातूर में बिजली के साथ हल्की बौछारों का अंदाज है। मौसम विभाग के मुताबिक बाकी राज्य में मौसम ज्यादातर सूखा रहने की उम्मीद है। विदर्भ के यवतमाल, चंद्रपुर, गडचिरोली और वाशिम जिलों में भी बारिश की चेतावनी है, जबकि कोल्हापुर जिले पर यलो अलर्ट बना रहेगा। नाशिक घाटमाथा, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, सातारा घाटमाथा और सांगली इलाके में तेज हवाओं और बादल गरजने की संभावना है। बीड, सोलापुर, धाराशिव, लातूर, परभणी, हिंगोली, नांदेड, अहिल्यानगर और छत्रपति संभाजीनगर में भी गरज के साथ बारिश हो सकती है। जलगांव, बुलढाणा, धुले और नंदुरबार जिलों के लिए इस दौरान कोई खास बारिश की चेतावनी नहीं है।

गुरुवार, 5 नवंबर को सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर और कोल्हापुर घाटमाथा इलाके में हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। यानी अगले तीन दिन राज्य के कुछ हिस्सों में रुक-रुककर बारिश, बादल और बिजली की कड़क देखने को मिल सकती है।

अब मुरासू तूफान की हालत देखें। बंगाल की खाड़ी का यह तीव्र चक्रवाती तूफान पिछले 6 घंटे में 8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-उत्तरपश्चिम की तरफ बढ़ा है। 3 नवंबर को सुबह 8.30 बजे यह ओंगोल से 30 किलोमीटर उत्तर-उत्तरपूर्व में, बापटला से 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में, कावली से 90 किलोमीटर उत्तर-उत्तरपूर्व में, विजयवाड़ा से 100 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपश्चिम में और मछलीपट्टनम से 120 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिणपश्चिम में था।

इसकी हवाओं की अधिकतम रफ्तार 95 से 105 किलोमीटर प्रति घंटा है और झोंके 115 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच रहे हैं। इसके उत्तर-उत्तरपश्चिम की तरफ ही बढ़ने की संभावना है। अंदाज है कि 3 नवंबर की दोपहर तक इसकी ताकत घटकर यह सामान्य चक्रवाती तूफान रह जाएगा, तब हवा की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंके 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकते हैं। आधी रात तक ताकत और कम होकर तीव्र कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जिस दौरान हवा 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंके 75 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकते हैं।

मौसम विभाग की 2 नवंबर को सुबह 11.30 बजे की जानकारी के मुताबिक मुरासू तब पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में सक्रिय था और 14 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ रहा था। 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह तक इसके दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच टकराने की संभावना जताई गई थी। तब हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का अंदाज था।

खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों के लोगों को सुरक्षित जगह ले जाने की तैयारी की गई थी और प्रशासन का जोर वक्त रहते लोगों को निकालने पर रहा। इससे पहले अर्णभ तूफान से इस इलाके में बड़ा नुकसान हुआ था। मुरासू के असर से आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तेलंगाना में 2 और 3 नवंबर को भारी से बहुत भारी बारिश का अंदाज था, कुछ जगह अतिवृष्टि की चेतावनी भी थी। तमिलनाडु में 2 नवंबर को तेज बारिश का अंदाज था। आंध्र प्रदेश के तट पर 2 और 3 नवंबर को हवा 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा तक जा सकती थी।

हालांकि महाराष्ट्र की बारिश के पीछे सिर्फ मुरासू को वजह नहीं माना जा सकता। मौसम विभाग के मुताबिक पूर्व-मध्य अरब सागर में कर्नाटक और दक्षिण महाराष्ट्र के तट से लगे इलाके में समुद्र तल से करीब 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर हवाओं का चक्राकार क्षेत्र सक्रिय हुआ है। इसके अलावा पूर्व-मध्य अरब सागर और आसपास 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक और चक्राकार क्षेत्र बना हुआ है।

इन दोनों सिस्टम के असर से कोकण और पश्चिम महाराष्ट्र समेत कुछ हिस्सों में बारिश के अनुकूल हालात बने हैं। इसलिए अगले कुछ दिन स्थानीय मौसम के हिसाब से हल्की बौछारें, बादलों की गड़गड़ाहट और तेज हवाएं रह सकती हैं। नवंबर की शुरुआत में ही बारिश लौट आई है, इसलिए किसानों और आम लोगों को अपने जिले के मौसम अंदाज पर नजर रखनी चाहिए।

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