मुंबई के पुनर्विकास की जंग पर बनी 'लास्ट मैन इन टावर' 6 नवंबर को Zee5 पर आएगी
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मनोज वाजपेयी, बोमन ईरानी और दिव्या दत्ता की फिल्म 6 नवंबर 2026 को हिंदी Zee5 पर रिलीज होगी। कहानी एक रिटायर्ड टीचर और पूरी सोसायटी के टकराव की है।
मुंबई जैसे तेजी से बदलते शहर में घर सिर्फ चार दीवारों का नाम नहीं होता। उससे कई यादें, जज्बात और रिश्ते जुड़े होते हैं। लेकिन जब पुराने घर की जगह नई इमारत का सपना खड़ा होता है, तो इन यादों और आने वाले कल की उम्मीदों के बीच टकराव शुरू हो जाता है। इसी टकराव को दिखाने वाली फिल्म 'लास्ट मैन इन टावर' अब दर्शकों के सामने आने वाली है।
फिल्म में मनोज वाजपेयी, बोमन ईरानी और दिव्या दत्ता मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह 6 नवंबर 2026 को हिंदी Zee5 पर रिलीज होगी। कहानी मुंबई के पुनर्विकास की पृष्ठभूमि में एक रिटायर्ड टीचर की है, जो अपने घर के लिए पूरी हाउसिंग सोसायटी के खिलाफ खड़ा हो जाता है।
फिल्म का मुख्य किरदार योगेश मिश्रा (मनोज वाजपेयी) है। वह मुंबई की एक पुरानी हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले रिटायर्ड फिजिक्स टीचर हैं। सोसायटी के बाकी रहने वालों ने पुनर्विकास का आकर्षक प्रस्ताव मंजूर कर लिया है, मगर योगेश अपना घर छोड़ने से साफ इनकार कर देते हैं।
पुनर्विकास से रहने वालों को आर्थिक फायदा और बेहतर भविष्य का मौका मिलने वाला है। पर योगेश के लिए उनका घर महज एक फ्लैट नहीं है। उस घर से उनकी ढेर सारी यादें और जज्बाती रिश्ता जुड़ा है, इसलिए वे अपनी बात पर अड़े रहते हैं। जिन पड़ोसियों को वे कभी अपना मानते थे, वही अब उनके सामने खड़े हो जाते हैं। योगेश के इनकार से बाकी रहने वालों के सपनों में अड़चन आती है और पूरी सोसायटी बनाम एक आदमी की यह लड़ाई और तीखी होती जाती है।
इस टकराव के बीच में संगीता पुरी (दिव्या दत्ता) का किरदार है। वे अपने स्पेशल नीड्स वाले बच्चे के बेहतर भविष्य की उम्मीद रखती हैं और पुनर्विकास के पक्ष में खड़ी होती हैं। उनके लिए यह प्रस्ताव परिवार की जिंदगी बदलने का मौका है। दूसरी तरफ बोमन ईरानी ने बिल्डर धर्मेन शाह का रोल निभाया है, जो पुनर्विकास की प्रक्रिया शुरू कराने की कोशिश में लगे हैं। इस तरह योगेश, संगीता और बिल्डर के बीच की खींचतान में जज्बाती और व्यावहारिक, दोनों तरह के पहलू जुड़ते हैं।
फिल्म अरविंद अडिगा के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। इसे स्पिरिट मीडिया के बैनर तले राणा दग्गुबाती ने प्रोड्यूस किया है। डायरेक्शन बेन रेखी का है और स्क्रीनप्ले सूनी तारापोरवाला ने लिखा है। फिल्म में मुंबई का शहरी पुनर्विकास, मध्यम वर्गीय जिंदगी की आर्थिक असुरक्षा और बेहतर भविष्य की चाहत जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। जब एक आदमी का फैसला पूरे समुदाय की साझा उम्मीदों से टकराता है, तो इंसानी रिश्ते कैसे बदलते हैं, यह भी फिल्म में देखने को मिलेगा।
मनोज वाजपेयी ने बताया कि योगेश मिश्रा के किरदार की पेचीदगी ने उन्हें खींचा। योगेश अपने यकीन पर कायम है, फिर भी दर्शकों के मन में सवाल उठता है कि वह सही है या गलत। एक एक्टर के नजरिए से उन्होंने इस उलझन को अहम बताया। उनके मुताबिक मुंबई जैसे शहर में पुनर्विकास रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। पुरानी इमारतों की जगह नई इमारतें खड़ी होती हैं, तो परिवारों की यादों और जज्बाती रिश्तों का क्या होता है, यह फिल्म इसी की पड़ताल करती है।
डायरेक्टर बेन रेखी ने कहा कि यह फिल्म समुदाय और परिवार को थामे रखने की कहानी है। उनके मुताबिक उथल-पुथल के दौर में एक-दूसरे से जुड़े रहना कितना जरूरी है, फिल्म यही रेखांकित करती है। उन्होंने यह भी कहा कि मनोज वाजपेयी और बोमन ईरानी जैसे दो दिग्गज कलाकारों को साथ लाने का तजुर्बा संतोष देने वाला रहा।
रेखी के मुताबिक यह लड़ाई सिर्फ सही और गलत की नहीं है। हर किरदार की अपनी हालत, अपनी जरूरत और भविष्य को लेकर अपनी उम्मीद है। इसी वजह से दर्शकों को इस टकराव को अलग-अलग नजरिए से देखने का मौका मिलता है। घर से जज्बाती लगाव, पड़ोसियों के बदलते रिश्ते, पुनर्विकास से मिलने वाले आर्थिक मौके और पुरानी यादें बचाए रखने की चाहत, इन सबका मेल फिल्म में दिखेगा।
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