बुधवार, 4 नवंबर 2026

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मुंबई की आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के खाते में दिवाली से पहले आई भाऊबीज भेंट

मुंबई की आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के खाते में दिवाली से पहले आई भाऊबीज भेंट तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

महिला और बाल विकास विभाग ने मुंबई की 10,200 से ज्यादा आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को भाऊबीज की भेंट सीधे बैंक खाते में भेजी है।

मुंबई की आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के लिए इस बार की दिवाली कुछ ज्यादा ही मीठी रहने वाली है। महिला और बाल विकास विभाग की तरफ से इस साल की भाऊबीज भेंट दिवाली से पहले ही सीधे उनके बैंक खाते में जमा कर दी गई है।

यह खुशखबरी बाल विकास प्रोजेक्ट अधिकारी भाऊसाहेब तोरकर ने एक प्रेस नोट के जरिए दी। उनके मुताबिक इस फैसले से मुंबई की 10,200 से ज्यादा आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं में खुशी का माहौल है।

पहले यह भेंट जिला स्तर से अलग-अलग तरीकों से बांटी जाती थी। इस बार एकात्मिक बाल विकास सेवा योजना आयुक्तालय ने नया कदम उठाया और रकम सीधे सेविकाओं और सहायिकाओं के बैंक खातों में डाल दी। पैसा सीधे हकदार महिलाओं तक पहुंचा, इसलिए पूरी बांटने की प्रक्रिया आसान, तेज और साफ-सुथरी हो गई है।

आयुक्तालय के इस डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से त्योहार के ऐन मौके पर महिलाओं को बड़ा आर्थिक सहारा मिला है। वक्त पर मदद पहुंचने से उनके काम का जोश भी दोगुना हो गया है, और मुंबई की सेविकाएं और सहायिकाएं इस बार उत्साह और खुशी के साथ दिवाली मना रही हैं।

इस भेंट को उनकी लगातार मेहनत और योगदान की कद्र के तौर पर देखा जा रहा है। दिवाली के मौके पर दी गई यह भाऊबीज भेंट सही मायने में उनके काम का सम्मान है।

आंगनवाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं महिला और बाल विकास विभाग की अलग-अलग योजनाओं को आखिरी आदमी तक पहुंचाने का बेहद जरूरी काम करती हैं। गर्भवती माताओं, बच्चों को दूध पिलाने वाली माताओं, नवजात बच्चों और छह साल से छोटे बच्चों की सेहत और पोषण का ख्याल रखना उनकी मुख्य जिम्मेदारी है।

बच्चों का वजन और कद नापना, कुपोषण का सर्वे करना, माताओं और बच्चों को सेहत के बारे में सलाह देना और प्री-प्राइमरी पढ़ाई के जरिए बच्चों का हर तरह से विकास कराना, ये सब मेहनत के काम वही करती हैं।

इसके अलावा सरकार के पोषण अभियान के तहत ये महिलाएं पोषण ट्रैकर सिस्टम पर लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन करती हैं, बच्चों की बढ़त पर नियमित नजर रखती हैं, पोषण आहार बांटने का सही हिसाब रखती हैं और वक्त-वक्त पर रिपोर्ट जमा करती हैं। समाज में सेहत और पोषण को लेकर जागरूकता फैलाने का बड़ा काम भी इन्हीं के जिम्मे है। इस पूरे सिलसिले में सहायिकाओं का योगदान भी उतना ही कीमती होता है।

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