शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

मीरा-भायंदर क्लस्टर योजना की शर्तें ढीली हुईं, भाजपा नेताओं में श्रेय लेने की होड़

मीरा-भायंदर क्लस्टर योजना की शर्तें ढीली हुईं, भाजपा नेताओं में श्रेय लेने की होड़ तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

राज्य सरकार ने क्लस्टर पुनर्विकास योजना की शर्तें ढीली की हैं। जो भाजपा नेता पहले योजना का विरोध कर रहे थे, वे अब फैसले का स्वागत कर रहे हैं।

मीरा-भायंदर की क्लस्टर पुनर्विकास योजना को लेकर भाजपा का रुख एक बार फिर चर्चा में है। शहर की पुरानी और खतरनाक इमारतों के पुनर्विकास के लिए अहम मानी जाने वाली यह योजना शुरू से ही राजनीतिक विवाद में फंसी रही है। अब राज्य सरकार ने इसकी शर्तें ढीली कर दी हैं। जो भाजपा नेता योजना का विरोध करते रहे थे, उन्होंने इस फैसले का स्वागत करना शुरू कर दिया है। इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में भाजपा के रुख में आए इस बदलाव पर बातें हो रही हैं।

मीरा-भायंदर के लिए क्लस्टर पुनर्विकास योजना 2022 में मंजूर हुई थी। इसके तहत शहर की पुरानी इमारतों का समूह बनाकर पुनर्विकास करने की योजना थी। इसी हिसाब से मीरा-भायंदर नगर निगम ने शहर के लिए 24 पुनर्विकास प्लान तैयार किए थे।

बाद में शिकायतें सामने आईं कि योजना की कुछ शर्तों की वजह से अलग-अलग खड़ी इमारतों के पुनर्विकास में दिक्कतें आ रही हैं। खास तौर पर ऐसी इमारतों को भी क्लस्टर में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा था। बताया गया कि इन शर्तों और पुनर्विकास के लिए जरूरी बाकी शर्तों से निवासियों में नाराजगी थी।

भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने योजना की सख्त शर्तों पर आपत्ति जताई थी और शुरू से ही इसका विरोध किया था। उनका आरोप था कि इस योजना की वजह से अलग इमारतों के पुनर्विकास में रुकावटें आ रही हैं। साल 2025 में उन्होंने मांग की थी कि क्लस्टर योजना रद्द की जाए या उसे वैकल्पिक बनाया जाए। लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उस वक्त यह मांग नहीं मानी थी। तब इस योजना को लेकर स्थानीय भाजपा नेतृत्व और राज्य सरकार के रुख का मुद्दा चर्चा में आया था।

अब राज्य सरकार ने क्लस्टर पुनर्विकास योजना की सख्त शर्तें ढीली करने का फैसला किया है। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे पुनर्विकास का रास्ता आसान होगा और अलग इमारतों से जुड़ी दिक्कतें दूर करने में मदद मिल सकती है। सरकार के फैसले के बाद भाजपा नेताओं ने इसका स्वागत किया है। साथ ही अब इसी फैसले को लेकर श्रेय की राजनीति शुरू होती दिख रही है।

शर्तें ढीली होने के बाद मीरा-भायंदर के भाजपा नेता सोशल मीडिया पर फैसले का स्वागत करती पोस्ट डालते दिख रहे हैं। यह कहते हुए कि इस फैसले से शहर के निवासियों को राहत मिलेगी, कुछ नेता अपनी-अपनी कोशिशों का श्रेय भी ले रहे हैं। लेकिन इसी योजना का पहले विरोध हुआ था, यह बात अब फिर उठ रही है। इसलिए सवाल किया जा रहा है कि क्लस्टर योजना पर भाजपा का रुख आखिर क्या है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और श्रेय की खींचतान से आगे एक बड़ा सवाल यह है कि यह योजना मीरा-भायंदर के नागरिकों के लिए असल में कितनी फायदेमंद होगी। शहर के लोगों की नजर इस पर है कि शर्तें ढीली होने के बाद पुरानी इमारतों के पुनर्विकास को रफ्तार मिलती है या नहीं, अटके हुए प्रस्ताव आगे बढ़ते हैं या नहीं, और निवासियों को सुरक्षित घर मिलने का रास्ता खुलता है या नहीं।

एक तरफ शर्तें ढीली करने के फैसले का स्वागत हो रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा के पहले के विरोध की याद दिलाई जा रही है। इस तरह मीरा-भायंदर में क्लस्टर पुनर्विकास का सवाल अब सिर्फ विकास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय राजनीति में श्रेय लेने का मुद्दा भी बन गया है।

#नागपुर#सियासत#PT24#Politics#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे