शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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राज ठाकरे का सवाल: सत्ता में बैठी BJP आखिर किससे लोकतंत्र बचाने की रैली निकाल रही है

राज ठाकरे का सवाल: सत्ता में बैठी BJP आखिर किससे लोकतंत्र बचाने की रैली निकाल रही है
राज ठाकरे | फाइल फोटो | Navbharat Live
सियासत PT24 टीम

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भाजपा के अभियान और गोकुल डेयरी विवाद पर सरकार से सवाल किए हैं। सरकार और मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने फैसले का बचाव किया है।

मुंबई: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि केंद्र और महाराष्ट्र, दोनों जगह सत्ता में बैठी पार्टी आखिर किससे लोकतंत्र बचाने के लिए रैलियां निकाल रही है।

राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा लोकतंत्र की बात तो करती है, लेकिन जब चुनाव के नतीजे उसके पक्ष में नहीं जाते, तब वही लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश करती है। उनके मुताबिक देश में शायद यह पहला उदाहरण होगा, जहां सत्ता में बैठी पार्टी खुद विपक्षी दलों के खिलाफ लोकतंत्र बचाने के लिए मार्च निकाल रही है।

उन्होंने सबसे ज्यादा आपत्ति महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले पर जताई, जिसमें बड़े सहकारी संस्थानों के प्रबंधन मंडल में सरकार की तरफ से नामित निदेशक रखने का प्रावधान है। इसी सिलसिले में उन्होंने कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ, यानी गोकुल डेयरी, के चुनाव और उसके बाद की घटनाओं का जिक्र किया। राज ठाकरे ने पूछा कि अगर भाजपा लोकतंत्र की रक्षा को लेकर सचमुच इतनी गंभीर है, तो गोकुल डेयरी के मामले में उसने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान क्यों नहीं किया। उन्होंने इसे भाजपा का दोहरा रवैया बताया। उनका कहना था कि पार्टी सत्ता में रहकर लोकतंत्र की बात करती है, पर फैसले अपने राजनीतिक हितों के हिसाब से लेती है।

आतंकवाद, देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर भाजपा के आंदोलनों पर भी राज ठाकरे ने सवाल किया। उनका कहना था कि इन मुद्दों पर सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, हर बार आंदोलन करके खुद को पीड़ित की तरह पेश नहीं करना चाहिए।

गोकुल डेयरी का चुनाव 19 अक्टूबर को हुआ था। कांग्रेस नेता सतेज पाटील की अगुवाई वाले पैनल ने 25 में से 13 निदेशक पद जीते, जबकि महायुति समर्थित पैनल को 12 सीटें मिलीं। इसके बाद 29 अक्टूबर को अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए बैठक बुलाई गई, लेकिन महायुति समर्थित 12 निदेशक उसमें नहीं आए। जरूरी 14 सदस्यों का कोरम पूरा नहीं हुआ, इसलिए अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पाया।

राज ठाकरे ने पूछा कि जब भाजपा समर्थित पैनल को बहुमत नहीं मिला, तो उसके बाद सरकार ने सहकारी संस्थाओं में पांच नामित निदेशक नियुक्त करने का फैसला क्यों किया। उनका आरोप था कि भाजपा को चुनाव का नतीजा मान लेना चाहिए था, ऐसे बदलाव नहीं करने चाहिए थे जिनसे सहकारी संस्था में सत्ता का संतुलन प्रभावित हो सकता है।

महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर को महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, 1960 में संशोधन को मंजूरी दी थी। इसके तहत 500 करोड़ रुपये से ज्यादा सालाना कारोबार वाली पात्र बड़ी सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन मंडल में सरकार पांच सदस्य नामित कर सकेगी। इनमें चार को वोट देने का अधिकार होगा, जबकि पांचवां सदस्य सरकारी प्रतिनिधि होगा और उसे वोट का अधिकार नहीं होगा। नामित सदस्य अध्यक्ष पद का चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे। गोकुल डेयरी भी इस वित्तीय पात्रता में आती है, इसलिए उसके संचालक मंडल का संख्या बल बदल सकता है।

विपक्ष का आरोप है कि दूध उत्पादकों ने चुनाव में जो जनादेश दिया, उसके बाद सरकार का यह फैसला निर्वाचित प्रतिनिधियों की ताकत घटाने की कोशिश है। कांग्रेस समर्थित पैनल का भी आरोप है कि चुनाव के बाद सहकारी कानून बदलकर सरकार दूध उत्पादकों के जनादेश को प्रभावित करना चाहती है।

राज्य सरकार ने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि इसका मकसद बड़ी सहकारी संस्थाओं में प्रशासनिक गतिरोध दूर करना और कामकाज चालू रखना है। सरकार का तर्क है कि कोरम पूरा न होने की वजह से संस्थाओं का कामकाज नहीं रुकना चाहिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि किसी भी पैनल को साफ बहुमत नहीं मिला था और कोरम लगातार पूरा न होने पर दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती थी।

अपने बयान के आखिर में राज ठाकरे ने भाजपा पर खुद को राजनीतिक रूप से पीड़ित दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में विपक्षी दलों ने भाजपा के राजनीतिक दबदबे का दौर सहा है और चुनावी हार के बावजूद लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक अगर अब देश की जनता का रुझान विपक्ष की ओर बढ़ रहा है, तो भाजपा को भी इस बदलाव को स्वीकार करना सीखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में इस समय पानी की भारी किल्लत है और भाजपा में सामान्य समझ की भी भारी कमी दिख रही है। उन्होंने इसे राज्य की राजनीति की विडंबना बताया।

इस बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोकुल डेयरी के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए 10 नवंबर को नई बैठक बुलाने का निर्देश दिया है।

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