मेलघाट के आश्रमस्कूलों में 4 हजार लोगों की सिकलसेल जांच, एमईसीएल के सीएसआर फंड से अभियान
मेलघाट के दुर्गम आदिवासी इलाके में विद्यार्थियों को सिकलसेल से बचाने और कुपोषण पर काबू पाने के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच और पोषण अभियान शुरू हुआ है।
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मेलघाट के दुर्गम और आदिवासी बहुल इलाके के विद्यार्थियों को सिकलसेल की बीमारी से बचाने और कुपोषण पर काबू पाने के मकसद से एक विशेष स्वास्थ्य जांच और पोषण अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान भारत सरकार के खान मंत्रालय के तहत काम करने वाली मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (एमईसीएल) के सीएसआर फंड से चलाया जा रहा है।
अभियान परिवर्तन समाज विकास समिति के जरिए चल रहा है। इसके तहत मेलघाट की अलग-अलग आश्रमशालाओं के 4 हजार विद्यार्थियों और नागरिकों की मुफ्त सिकलसेल जांच की जाएगी।
अभियान की शुरुआत धारणी तालुका की सरकारी आदिवासी आश्रमशाला, बिजुधावडी से हुई। अभियान के पांचवें दिन अंग्रेज़ी माध्यम बालिका आश्रमशाला की सैकड़ों छात्राओं की स्वास्थ्य जांच की गई। विशेषज्ञ मेडिकल टीम ने आधुनिक उपकरणों की मदद से विद्यार्थियों के खून के नमूने लेकर सिकलसेल की जांच की।
जांच के दौरान सिकलसेल वाहक और सिकलसेल के मरीजों की पहचान की जा रही है। जांच के बाद राष्ट्रीय सिकलसेल अभियान की गाइडलाइन के मुताबिक विद्यार्थियों की स्थिति के हिसाब से उन्हें अलग-अलग रंगों के स्टेटस कार्ड दिए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को सिकलसेल की बीमारी, इलाज और रोकथाम के बारे में काउंसलिंग भी दी जा रही है।
अभियान में हर विद्यार्थी का डिजिटल रजिस्ट्रेशन करके खून की जांच की जा रही है। वाहक और मरीजों की अलग-अलग पहचान हो जाने के बाद उन्हें बीमारी, इलाज, आगे चलकर शादी से पहले होने वाली सिकलसेल जांच और जीवनसाथी की जांच के बारे में मार्गदर्शन दिया जाएगा। गंभीर मरीजों को धारणी और चिखलदरा के उपजिला अस्पतालों में मुफ्त रेफरल सेवा और जरूरी इलाज मुहैया कराया जाएगा।
अभियान को सफलता से चलाने में एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (आईटीडीपी), धारणी के परियोजना अधिकारियों का मार्गदर्शन और प्रशासनिक तालमेल अहम रहा है। आश्रमशाला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल टीमों के तालमेल से अभियान को गति मिली है।
मेलघाट के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले विद्यार्थियों को जांच के लिए दूर न जाना पड़े, इसलिए परिवर्तन समाज विकास समिति की मोबाइल मेडिकल टीम अलग-अलग आश्रमशालाओं में पहुंचेगी। बिजुधावडी आश्रमशाला से शुरुआत के बाद तय कार्यक्रम के मुताबिक बाकी आश्रमशालाओं में भी जांच शिविर लगाए जाएंगे।