मेलघाट के आदिवासियों ने अमरावती में निकाला मोर्चा, पक्की सड़कों की मांग
पक्की सड़क न होने से परेशान आदिवासी भाइयों ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक मोर्चा निकाला और आगे तीखे आंदोलन की चेतावनी दी।
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अमरावती जिले के मेलघाट में आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां पक्की सड़क नहीं है। सड़क न होने की वजह से वहां रहने वाले आदिवासी भाइयों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी गंभीर समस्या की तरफ प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए उन्होंने अमरावती में मोर्चा निकाला और अपना गुस्सा खुलकर जाहिर किया।
यह मोर्चा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चौक से शुरू हुआ और जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचा। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग यह है कि मेलघाट के हर गांव में अच्छी क्वालिटी की सीसी सड़कें बनाई जाएं।
डोमी, भूत्रूम, कुही, रुईपठार और चिलाटी समेत ऐसे कई गांव हैं जहां सड़कों की समस्या साफ दिखाई देती है। मेलघाट के कई गांवों में सड़कों की बदहाली बनी हुई है और लोग इससे परेशान हैं।
आंदोलनकारियों ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में सड़कें न होने के कारण लोगों को आने-जाने में तो मुश्किल होती ही है, रोजमर्रा के कामों में भी अड़चनें आती हैं। आंदोलनकारी और गांव के लोग मांग कर रहे हैं कि प्रशासन इन मांगों पर फौरन ध्यान दे और सड़कों के सवाल पर ठोस कदम उठाए।
मोर्चे की अगुवाई भैयालाल मावस्कर ने की। उन्होंने और मेलघाट के नागरिकों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर इन समस्याओं को नजरअंदाज किया गया तो आने वाले दिनों में और तीखा आंदोलन किया जाएगा। मावस्कर ने साफ कहा कि सड़कों की समस्या जल्दी नहीं सुलझाई गई तो आगे आंदोलन छेड़ा जाएगा।
इसी दौरान मेलघाट के ग्रामीणों ने एक और मांग को लेकर अमरावती जिला परिषद के सामने धरना आंदोलन भी किया। उनकी मांग थी कि स्थानीय बोली कोरकू जानने वाले स्वास्थ्य और प्रशासनिक कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए। इस पर सीईओ सत्यम गांधी ने कार्रवाई का आश्वासन दिया।
अब मेलघाट के लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इन मांगों पर कितना ध्यान देता है और सड़कों के सवाल पर क्या कदम उठाता है।