गुदमा-गणखैरा नई रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण पर किसान भड़के, आंदोलन की चेतावनी
गोंदिया जिले में प्रस्तावित गुदमा-गणखैरा रेल लाइन के लिए हो रहे जमीन अधिग्रहण के खिलाफ डव्वा के रेलवे पुल के पास किसानों ने सभा की।
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गोंदिया जिले में गुदमा से गणखैरा के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है और इसे लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। अपनी उपजाऊ खेती की जमीन बचाने और प्रभावित परिवारों के भविष्य की सुरक्षा के लिए किसानों ने 12 अक्टूबर को डव्वा के रेलवे पुल के पास सभा की और अधिग्रहण का तीखा विरोध किया। किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर उन्हें भरोसे में लिए बिना और उनकी मांगों पर सही फैसला किए बिना अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, तो आंदोलन और तेज होगा।
यह सभा पूर्व विधायक खोमेश्वर रहांगडाले के मार्गदर्शन में हुई। अकोला की किसान संगठन के लक्ष्मीकांत कोटकर प्रमुख अतिथि के तौर पर मौजूद थे। 'रेल भू-संपादन संघर्ष कृती समिति' के अध्यक्ष एल. डी. चंद्रिकापुरे, सचिव राजकुमार (पप्पू) पटले, चित्रकला चौधरी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गट) के जिलाध्यक्ष रविकांत बोपचे, स्नेहा कोल्हे और राजकुमार यादव भी आए। डव्वा, गणखैरा, तुमखेडा और आसपास के प्रभावित गांवों के काफी किसान सभा में पहुंचे।
किसानों की नाराजगी की बड़ी वजह यह है कि रेलवे विभाग ने उन्हें पहले से कोई सूचना दिए बिना जमीन का सर्वे किया और उसके बाद सीधे जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी। इस प्रस्तावित रेल लाइन से गोरेगाव तहसील के तुमखेडा बुजुर्ग, डव्वा, गणखैरा और हिरडामाली गांवों के किसानों की उपजाऊ जमीन जाने का डर है।
किसानों ने कहा कि खेती ही उनकी रोजी-रोटी का मुख्य सहारा है और जमीन चली गई तो परिवारों के सामने भूखों मरने की नौबत आ जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि विकास के नाम पर पीढ़ियों से खेती पर निर्भर परिवारों के भविष्य को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है।
समिति के सचिव राजकुमार (पप्पू) पटले ने किसानों की मांगें रखते हुए कहा, "हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन किसानों के हित की बलि देकर किया जाने वाला विकास मंजूर नहीं किया जाएगा। सरकार प्रभावित किसानों को भरोसे में लेकर उनकी समस्याओं पर चर्चा करे और सही मुआवजा तय होने के बाद ही अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाए।"
पटले ने एक अहम शर्त भी रखी। उनकी मांग है कि रेल प्रोजेक्ट के लिए जिस किसान की जमीन ली जाए, उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। उनके मुताबिक सिर्फ जमीन का मुआवजा देना काफी नहीं है, जिन परिवारों की रोजी हमेशा के लिए छिन जाएगी, उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम जरूरी है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार गट) के जिलाध्यक्ष रविकांत बोपचे ने आरोप लगाया कि प्रभावित किसानों से कोई चर्चा किए बिना एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सही मुआवजा, पुनर्वास और किसानों की सहमति को प्राथमिकता देने की मांग की। गोरेगाव पंचायत समिति की सभापति चित्रकला चौधरी ने भी कहा कि प्रशासन को किसानों से बात करके उनके हित में फैसले लेने चाहिए।
सभा में किसानों ने प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं: सही मुआवजा, पुनर्वास का उचित इंतजाम, अधिग्रहण से पहले पारदर्शी चर्चा और प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने इन पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो गुदमा-गणखैरा रेल लाइन का जमीन अधिग्रहण एक बड़े किसान आंदोलन का हिस्सा बन जाएगा।