MBBS पहले साल के छात्रों को राहत, पास होने के लिए मिलेगा एक और मर्सी अटेम्प्ट
NMC ने 2019-20 और उसके बाद एडमिशन लेने वाले छात्रों को पहले साल की परीक्षा के लिए एक अतिरिक्त मौका दिया है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने एमबीबीएस के पहले साल के छात्रों को बड़ी राहत दी है। साल 2019-20 और उसके बाद एडमिशन लेने वाले मेडिकल छात्र-छात्राओं को पहले साल की परीक्षा पास करने के लिए एक अतिरिक्त अटेम्प्ट मिलेगा।
अब पहले साल की परीक्षा पास करने के लिए कुल 5 मौके मिलेंगे, जबकि पहले सिर्फ चार ही मौके मिलते थे। यह छूट उन छात्रों को भी मिलेगी जिन्होंने पहले साल का कोर्स पूरा करने के लिए तय किया गया 4 साल का समय पार कर लिया है। शर्त यह है कि उनका एडमिशन वैध होना चाहिए और संबंधित यूनिवर्सिटी या कॉलेज ने उसे रद्द न किया हो।
यह कदम उन मेडिकल छात्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो पहले साल के विषयों के बैकलॉग की वजह से पढ़ाई में हो रही देरी से परेशान थे। यह अतिरिक्त मौका पात्र छात्रों को जरूरी परीक्षा पास करने और अपनी मेडिकल ट्रेनिंग आगे बढ़ाने का एक और चांस दे सकता है। मर्सी अटेम्प्ट देने के प्रस्ताव पर 23 सितंबर 2026 को NMC की 18वीं बैठक में चर्चा हुई थी।
आयोग को छात्रों, यूनिवर्सिटियों और दूसरे संबंधित पक्षों से कई अर्जियां मिली थीं, जिनमें पहली प्रोफेशनल MBBS परीक्षा पास करने के लिए ज्यादा मौके देने की मांग की गई थी। छात्रों ने अपनी अर्जियों में कोविड-19 महामारी से पढ़ाई में आई रुकावट, सेहत से जुड़ी दिक्कतें और निजी मुश्किलों का हवाला दिया था।
यह नया फैसला पेंडिंग मामलों के लिए एक बार दी जाने वाली अस्थायी छूट है। इससे पहले साल की MBBS परीक्षा के लिए ऐसा कोई नियम नहीं बनता, जिसे अनगिनत बार लागू किया जा सके। यानी यह छूट सिर्फ एक बार के लिए दी गई है, हमेशा के लिए नहीं।
इस अतिरिक्त मौके का मतलब यह नहीं है कि छात्र अपनी मेडिकल डिग्री पूरी करने के लिए जितना चाहें उतना वक्त ले सकते हैं। NMC ने साफ किया है कि इस फैसले के मुताबिक MBBS कोर्स पूरा करने की अधिकतम सीमा एडमिशन की तारीख से 10 साल है।
जिन छात्रों ने पहले ही एक मर्सी अटेम्प्ट इस्तेमाल कर लिया है और अपने सभी पांच मौके पूरे कर चुके हैं, वे इस नए फैसले के तहत किसी और मौके के हकदार नहीं होंगे। NMC ने साफ किया है कि ऐसे छात्रों को इस छूट के तहत छठा मौका नहीं मिलेगा, चाहे वे आयोग के पुराने फैसले या अदालत के किसी निर्देश का हवाला क्यों न दें।
NMC ने सभी संबंधित यूनिवर्सिटियों, मेडिकल कॉलेजों और दूसरे पक्षों को सलाह दी है कि वे इस फैसले को नोट कर लें और पात्र मामलों में उसके हिसाब से कार्रवाई करें।