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20:08 IST

मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आबिटकर बोले, टेली-मानस और क्लिनिकों से मजबूत होंगी सेवाएं

स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का जाल मजबूत किया जा रहा है, ताकि लोगों को वक्त पर मदद मिल सके।

मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आबिटकर बोले, टेली-मानस और क्लिनिकों से मजबूत होंगी सेवाएं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई: राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता, काउंसलिंग और इलाज की सेवाएं लोगों तक आसानी से पहुंचाने के लिए महाराष्ट्र में कई पहल चल रही हैं। उनके मुताबिक सरकार चाहती है कि मानसिक परेशानियों को देखने का नजरिया बदले और लोगों को सही वक्त पर मदद मिले।

सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग का जोर टेली-मानस हेल्पलाइन, मनशक्ति क्लिनिक, स्मृतिदोष क्लिनिक और मनोसामाजिक पुनर्वास सेवाओं के जरिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क मजबूत करने पर है।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्टूबर) के मौके पर राज्य में 'मनजागृति' और 'मनसंवाद' के संदेश दिए जा रहे हैं। इस साल की वैश्विक थीम उन लोगों की बात सुनने की है, जिन्होंने खुद यह अनुभव किया है, और उससे सकारात्मक बदलाव लाने की है। मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे लोगों को सिर्फ सुन लेना काफी नहीं है, उनके अनुभवों को सेवाओं और फैसले लेने की प्रक्रिया में भी जगह मिलनी चाहिए।

टेली-मानस एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन है, जो 24 घंटे चालू रहती है। तनाव, चिंता, डिप्रेशन और दूसरी मानसिक परेशानियों के बारे में इससे मार्गदर्शन मिल सकता है। जानकारी के मुताबिक राज्य में 2022-23 से अप्रैल 2026 तक इस सेवा को 3 लाख 27 हजार से ज्यादा कॉल मिले हैं। लोग फोन पर ही संपर्क कर सकते हैं, इसलिए इस सेवा की अहमियत बढ़ी है। टेली-मानस का हेल्पलाइन नंबर 14416 है।

मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं लोगों के करीब मिलें, इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर मनशक्ति क्लिनिक के जरिए सेवा देने पर जोर है। यहां मानसिक समस्याओं की वक्त रहते पहचान, काउंसलिंग और इलाज हो सकता है, और जरूरत पड़ने पर आगे की चिकित्सा सेवाओं के लिए रेफर भी किया जाता है। मानसिक समस्याओं से गुजर रहे लोगों के पुनर्वास और समाज में फिर से जुड़ने के लिए भी कोशिशें की जा रही हैं।

बढ़ती उम्र में याददाश्त से जुड़ी परेशानियों की जांच और इलाज के लिए स्मृतिदोष क्लिनिकों में खास ओपीडी सेवाएं दी जा रही हैं। जानकारी है कि इन क्लिनिकों से हर साल करीब 45 हजार से ज्यादा लोग फायदा लेते हैं। स्मृतिदोष से जूझ रहे बुजुर्गों और उनके परिवारों को मार्गदर्शन और जरूरी मेडिकल मदद दिलाने में इन सेवाओं की भूमिका अहम बताई गई है।

सरकार के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं को भी जोड़ा जा रहा है। आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट, एकलव्य फाउंडेशन और श्रद्धा फाउंडेशन जैसी संस्थाओं के सहयोग से जागरूकता, काउंसलिंग और समुदाय के स्तर पर मदद के प्रयास हो रहे हैं। सरकार, स्वास्थ्य कर्मचारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और समाज के तालमेल से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को ज्यादा असरदार बनाने का लक्ष्य है।

मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को लेकर समाज में जो गलतफहमियां और कलंक की सोच है, उसे दूर करना वक्त की जरूरत है। 'मनजागृति' के संदेश में ऐसे लोगों की बात संवेदनशीलता से सुनने की अपील है, जबकि 'मनसंवाद, बोलें, सुनें, समझें' पहल के जरिए मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने की अपील की जा रही है।

मानसिक स्वास्थ्य सेवा अधिनियम, 2017 के तहत मानसिक बीमारी वाले लोगों के अधिकार, सम्मान और गोपनीयता का ख्याल रखना जरूरी है। आबिटकर ने अपील की कि मानसिक समस्याओं को नजरअंदाज न करें, सही वक्त पर मदद लें और जरूरतमंदों को सहारा दें। उन्होंने कहा कि जागरूक, संवेदनशील और कलंकमुक्त समाज बनाने के लिए नागरिक भी आगे आएं।

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