शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

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19:21 IST

साँप की पहचान कैसे करें, कौन से साँप ज़हरीले हैं और सर्पदंश होने पर क्या न करें

बारिश के मौसम में खेत, घर के पास, गौशाला या बाग में साँप दिखने के मामले बढ़ जाते हैं। जानिए ज़हरीले साँपों की पहचान और सर्पदंश के बाद की सावधानियाँ।

साँप की पहचान कैसे करें, कौन से साँप ज़हरीले हैं और सर्पदंश होने पर क्या न करें तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

बारिश के दिनों में खेत, घर के आसपास, गोशाला या बाग में साँप दिखने की घटनाएँ काफ़ी सामने आ रही हैं। गर्मी के मौसम में भी ठंडक की तलाश में साँप घर के अंदर या ठंडी जगहों पर आकर बैठ जाते हैं। यह विषय अहम भी है और सुरक्षा से भी जुड़ा है। साँपों के बारे में बहुत सी बातें हमें पता नहीं होतीं। हर साँप ज़हरीला नहीं होता और सब साँपों का रंग एक जैसा भी नहीं होता। किसी के शरीर पर साफ़ गोल निशान होते हैं, किसी पर बिंदियाँ, तो किसी का रंग हरा या भूरा होता है। इसलिए सिर्फ़ रंग या आकार देखकर साँप को पक्के तौर पर पहचानने की कोशिश ख़तरनाक साबित हो सकती है।

भारत में गंभीर सर्पदंश के लिए मुख्य रूप से चार साँप अहम माने जाते हैं: नाग, मण्यार, घोणस और फुरसे। घोणस का शरीर मोटा होता है और उसकी पीठ पर गहरे भूरे, गोलाई लिए हुए धब्बों की 3 कतारें दिखती हैं। इसे ज़्यादा ज़हरीला माना जाता है। इसके डसने से एक-एक करके मांसपेशियों का काम करना बंद हो जाता है और मौत हो जाती है।

नाग की गर्दन के पीछे फन होता है और कुछ नागों के फन पर चश्मे जैसा निशान भी दिखता है। मण्यार आम तौर पर काले रंग का होता है और उसके शरीर पर सफ़ेद आड़ी पट्टियाँ हो सकती हैं। फुरसे आकार में अपेक्षाकृत छोटा, भूरे रंग का होता है और उसके शरीर पर लहरों जैसे निशान होते हैं। ये सिर्फ़ शुरुआती पहचान की बातें हैं। साँप की पहचान जानकारों से ही करवानी चाहिए। सिर्फ़ दिखावट के आधार पर किसी भी साँप को छूना या पकड़ना बहुत ख़तरनाक हो सकता है।

धामन महाराष्ट्र में पाया जाने वाला बिना ज़हर का साँप है। उसका शरीर लंबा और आगे की ओर पतला होता है। उसका रंग भूरा, पीलापन लिए या स्लेटी रंगत में दिख सकता है। धामन और नाग में कभी-कभी समानता लग सकती है, इसलिए साँप की पहचान न हो पाए तो उसके पास जाने से बचना चाहिए। अजगर बड़े आकार का, मोटे शरीर वाला साँप है और उसके शरीर पर भूरे और हल्के रंगों के साफ़ नक्श होते हैं। कोकण और पश्चिमी घाट के इलाक़े में स्थानीय माहौल के हिसाब से अलग-अलग प्रजातियाँ मिलती हैं। आंबा घाट जैसे सह्याद्रि के हिस्सों में मलबार पिट वायपर जैसे साँप भी मिल सकते हैं।

बारिश में साँप इंसानी बस्ती के पास क्यों आते हैं? बिलों में पानी घुस जाना, प्रजनन का समय, खाने की तलाश और चूहों या मेंढकों का मिलना, इन वजहों से साँप आबादी के नज़दीक आते रहते हैं। घर में साँप दिखे तो छोटे बच्चों और पालतू जानवरों को दूर रखें। साँप को न मारें, डंडे से न भगाएँ और न ही पकड़ने की कोशिश करें। सुरक्षित दूरी से नज़र रखें और प्रशिक्षित सर्पमित्र की मदद लें।

सर्पदंश होने पर पहले पल में क्या करें? व्यक्ति को शांत रखें, हरकत कम से कम होने दें और जिस हाथ या पैर पर साँप ने काटा है उसे स्थिर रखें। जितना कम ब्लड प्रेशर और हरकत होगी, उतना कम ज़हर फैलेगा। अंगूठी, घड़ी या कसी हुई चीज़ें उतार दें और फ़ौरन अस्पताल ले जाएँ। मुँह से ज़हर चूसने की कोशिश न करें, ज़ख़्म को न काटें, कसकर रस्सी न बाँधें और घरेलू नुस्ख़े न आज़माएँ। साँप की फ़ोटो सुरक्षित दूरी से खिंच सके तभी खींचें, बल्कि उसके लिए वक़्त ज़ाया न करें।

सर्पदंश के बाद दर्द कम हो या लक्षण तुरंत न दिखें, तब भी इलाज बिल्कुल नहीं टालना चाहिए। सही वक़्त पर अस्पताल पहुँचना और डॉक्टरों की निगरानी में इलाज लेना जान बचाने के लिए बेहद अहम है।

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