बेंगलुरु के IISc में माइंडटेक समिट 2026, एआई और मानसिक सेहत पर जुटे विशेषज्ञ
TANUH की ओर से बेंगलुरु में दो दिन का माइंडटेक समिट 2026 हो रहा है, जिसका मुख्य विषय एआई के दौर में मानसिक स्वास्थ्य है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और मानसिक स्वास्थ्य के बढ़ते रिश्ते पर बात करने के लिए बेंगलुरु में माइंडटेक समिट 2026 का आयोजन हुआ है। यह कार्यक्रम 5 और 6 अक्टूबर, दो दिन चल रहा है और इसकी जगह है बेंगलुरु का इंडियन इन्स्टिट्यूट ऑफ साइंस।
समिट TANUH की ओर से आयोजित किया गया है। TANUH का पूरा नाम ट्रांसलेशनल एआई फॉर नेटवर्क्ड यूनिवर्सल हेल्थकेयर बताया गया है। इस बार समिट का मुख्य विषय है एआई के दौर में मानसिक स्वास्थ्य।
आयोजकों के मुताबिक समिट का मकसद मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एआई के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, तकनीक के जानकारों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, नीति बनाने वालों और स्टार्टअप को एक ही मंच पर लाना है। आयोजकों ने कहा कि भारत और दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े एआई पर रिसर्च, क्लिनिकल प्रैक्टिस और टेक्नोलॉजी के स्तर पर काम चल रहा है। उनका कहना है कि इन सभी क्षेत्रों के बीच अच्छा तालमेल होना जरूरी है।
समिट में मुख्य भाषण, पैनल चर्चा, विशेषज्ञों के व्याख्यान और हेल्थ टेक्नोलॉजी में उभरते उपायों की प्रदर्शनी शामिल है।
मुख्य वक्ताओं में हार्वर्ड के इप्सित वाहिया, कॉर्नेल टेक की तन्झिम चौधरी, नेशनल त्सिंग हुआ यूनिवर्सिटी के ची-चुन (जेरेमी) ली और यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के डॉ. वेंकट भट शामिल हैं।
पहले दिन सुबह 8:30 से 9:30 बजे तक रजिस्ट्रेशन हुआ। उसके बाद स्वागत समारोह हुआ और करीब 10 बजे कार्यक्रम की शुरुआत हुई। पहला मुख्य सत्र शुरू हुआ तो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के डॉ. इप्सित वाहिया ने "सेन्सर्स से प्रत्यक्ष अमल तक: एआई को स्वास्थ्य सेवा में शामिल करने के कई पेचीदा पहलू" विषय पर अपनी बात रखी।
आसान शब्दों में कहें तो उन्होंने सेंसर से मिलने वाली जानकारी से लेकर असल में मरीजों की देखभाल तक एआई को पहुंचाने में आने वाली अलग-अलग दिक्कतों पर बात की। इसके बाद "सीमा तय करना: मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका क्या होनी चाहिए?" विषय पर पैनल चर्चा रखी गई।