लातूर में त्योहारों से पहले महंगाई की मार, दाल और सब्जी के दाम चढ़े, घर का बजट बिगड़ा
लातूर जिले में सूखे जैसे हालात के बीच दाल, अनाज, खाने के तेल और सब्जियों के दाम बढ़ने से आम परिवारों का घरखर्च बिगड़ गया है।
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लातूर जिले में सूखे जैसे हालात पहले से बने हुए हैं और अब महंगाई ने भी आम आदमी की कमर तोड़ दी है। अनाज, दाल, खाने का तेल और सब्जियों के दाम बढ़ने से घर का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। एक तरफ बारिश की कमी और खेती पर आया संकट है, दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई का बोझ। इसका असर आम परिवारों की जेब पर साफ दिख रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक महंगाई दर 4.63 प्रतिशत से बढ़कर 5.48 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सब्जियों और अनाज के दाम में बढ़ोतरी को इसकी सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है।
खास बात यह है कि सरकार की निगरानी में रखी गई 42 जरूरी चीजों में से 41 चीजों के दाम पिछले एक साल में बढ़े हैं। बाजार में दालों के चढ़े हुए दामों ने ग्राहकों को सबसे ज्यादा झटका दिया है। चना दाल 100 रुपये, मूंग दाल 130 रुपये और तूर दाल 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। लोबिया दाल 140 रुपये और मसूर दाल 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात सामने आई है।
दाल के साथ ज्वार, बाजरा, चावल और गेहूं के दाम भी बढ़े हैं, जिससे रोज के खाने का खर्च ऊपर चला गया है। गेहूं और लोकवन गेहूं के दाम करीब 35 रुपये प्रति किलो हैं, इसलिए परिवारों का महीने का किराना खर्च भी बढ़ रहा है।
प्याज के साथ सूरजमुखी तेल, सरसों का तेल, पाम तेल और सोयाबीन तेल के दाम भी चढ़े हैं। इससे रसोई का खर्च और बढ़ गया है। दिवाली को देखते हुए चीनी के दाम बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
अभी नवरात्रि चल रही है, इसलिए फल और व्रत में काम आने वाली चीजों की मांग बढ़ी है। साबूदाना, मूंगफली और समा के चावल जैसी चीजें महंगी होने से व्रत रखने वालों को भी ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं। फलों के दाम बढ़ने से त्योहार के दिनों का खर्च संभालना मुश्किल हो गया है।
जिले में सूखे जैसे हालात का असर खेती की पैदावार पर पड़ा है। लोगों को डर है कि फसलों की पैदावार घटी तो दाम और बढ़ सकते हैं। महंगाई की सबसे ज्यादा मार कम और मध्यम आमदनी वाले परिवारों पर पड़ रही है। घर के खर्च, किराना, सब्जी, पढ़ाई, सेहत और दूसरी जरूरतों पर ज्यादा पैसा लग रहा है, इसलिए बचत पर भी असर पड़ रहा है।
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