सोड्डी में बंद ढाबे में सिलिंडर फटे, 10 मजदूर परिवारों का सामान और 4 दोपहिया राख
मंगळवेढा तालुका के सोड्डी परिसर में उमदी रोड पर बंद ढाबे में गैस सिलिंडर फटने से लातूर जिले के 10 मजदूर परिवारों का सामान जल गया। किसी की जान नहीं गई।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सोलापुर जिले के मंगलवेढा तालुका में उमदी रोड पर सोड्डी परिसर के एक बंद ढाबे में गैस सिलिंडर का जोरदार धमाका हुआ। इस ढाबे में लातूर जिले के 10 मजदूर परिवार रह रहे थे। धमाके में उनके रहने की जगह के पतरे उड़ गए और घर का सारा सामान जल गया। चार दोपहिया गाड़ियां भी आग की चपेट में आकर खाक हो गईं। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी की जान नहीं गई।
ये परिवार लातूर जिले के औसा तालुका के निलंगा के रहने वाले हैं। सोलापुर और सांगली जिले की सीमा पर मंगलवेढा तालुका के दक्षिणी हिस्से में सोड्डी परिसर पड़ता है। यहां अंगूर के बागों की छंटाई के काम के लिए ये परिवार पिछले 15 साल से रोजगार की तलाश में रह रहे हैं। जहां भी मजदूरी मिलती है, वहां जाकर काम करना ही इनकी रोजी-रोटी का सहारा है। सोड्डी में काम के लिए आने के बाद रहने का इंतजाम इन्हें इसी बंद ढाबे में करना पड़ा था।
आज दोपहर ये मजदूर छंटाई के काम से वहां के पूर्व सरपंच के खेत में गए हुए थे। इसी बीच उनके रहने की जगह पर अचानक गैस का धमाका हो गया। बताया गया कि वहां करीब छह सिलिंडर थे, इसलिए एक के बाद एक छह बड़े धमाके सुनाई दिए। इन आवाजों से आसपास के लोगों में डर फैल गया।
धमाकों के बाद आग की ऊंची लपटें दिखने लगीं। पास के स्कूल के कुछ कर्मचारी आग बुझाने में मदद के लिए जाने की तैयारी में थे, लेकिन तभी फिर से धमाके की आवाज आई, तो वे सुरक्षित दूरी पर ही रुक गए। घटना की खबर मंगलवेढा के फायर ब्रिगेड को दी गई। फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। तब तक मजदूरों के रहने की जगह को भारी नुकसान हो चुका था।
धमाके की जगह से कुछ ही दूरी पर एक माध्यमिक स्कूल है, इसलिए बच्चों की सुरक्षा का सवाल भी उठ खड़ा हुआ है। किसी की जान नहीं गई, फिर भी धमाका आखिर किस वजह से हुआ, इसका कारण अभी साफ नहीं हो सका है।
आग में मजदूर परिवारों के कपड़े, घर में काम आने वाली चीजें और बाकी सारा सामान नष्ट हो गया। चार दोपहिया गाड़ियां भी पूरी तरह जल गईं, जिनमें से दो गाड़ियां कुछ महीने पहले ही नई खरीदी गई थीं। सालों की मेहनत से जो गृहस्थी खड़ी की थी, वह कुछ ही पल में उजड़ गई। रोज की मजदूरी से घर चलाने वाले इन परिवारों को इससे बड़ा आर्थिक झटका लगा है और अब उनके सामने नए सिरे से गृहस्थी जमाने की चुनौती है।
घटना की जानकारी मिलते ही पटवारी, ग्राम सेवक और तहसीलदार ने मौके पर जाकर जगह का मुआयना किया।