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20:39 IST

कॉर्टेवा की #2MillionWomen पहल के दो साल, 6.37 लाख से ज्यादा महिलाओं तक पहुंचा फायदा

कॉर्टेवा एग्रीसाइंस की #2MillionWomen पहल सितंबर 2024 में शुरू हुई थी। दो साल में 22 राज्यों में 7 लाख 95 हजार से ज्यादा लोगों तक यह पहुंची है, जिनमें 6 लाख 37 हजार से ज्यादा महिलाएं हैं।

कॉर्टेवा की #2MillionWomen पहल के दो साल, 6.37 लाख से ज्यादा महिलाओं तक पहुंचा फायदा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

कॉर्टेवा एग्रीसाइंस ने दो साल पहले यह सोचकर #2MillionWomen पहल शुरू की थी कि महिलाएं आगे बढ़ेंगी तो खेती का क्षेत्र भी आगे बढ़ेगा। कंपनी का कहना है कि यह सोच अब जमीन पर दिख रही है। ग्रामीण भारत की महिलाएं अपनी रोजी-रोटी के साधन मजबूत कर रही हैं, खेती के आधुनिक और बेहतर तरीके अपना रही हैं, नए कारोबार शुरू कर रही हैं और नेतृत्व की भूमिका में आकर अपने समुदाय में बदलाव ला रही हैं।

यह पहल सितंबर 2024 में शुरू हुई थी। इसका लक्ष्य 2030 तक भारत में खेती की पूरी वैल्यू चेन में महिलाओं को सक्षम बनाना है। खेती में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व बढ़ाने पर ध्यान देने वाली बड़े स्तर की कॉर्पोरेट पहलों में इसे पहली पहलों में गिना गया है। मकसद यह है कि महिलाओं को किसान, उद्यमी और समुदाय की लीडर के रूप में कामयाब होने के लिए जरूरी हुनर, जानकारी और मौके मिलें।

आंकड़ों में देखें तो पिछले दो साल में इस पहल का फायदा देश के 22 राज्यों में 7 लाख 95 हजार से ज्यादा लोगों तक पहुंचा है। इनमें 6 लाख 37 हजार से ज्यादा महिलाएं हैं। करीब 49 हजार महिलाएं अब नेतृत्व की भूमिका में काम कर रही हैं। 90 हजार से ज्यादा किसानों को ट्रेनिंग दी गई है और 1 लाख 54 हजार से ज्यादा लोगों की रोजी-रोटी के साधन मजबूत किए गए हैं। इसके अलावा 1 लाख 71 हजार हेक्टेयर से ज्यादा खेत में खेती के बेहतर तरीके अपनाए गए हैं।

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले की महिलाओं का उदाहरण दिया गया है। वहां की महिलाएं कई पीढ़ियों से महुआ के फूल इकट्ठा करके उन्हें बहुत कम दाम पर बेचती थीं या उनसे स्थानीय देशी शराब बनाती थीं। गरीबी और सामाजिक कलंक के चक्र में फंसी इन महिलाओं की जिंदगी को महिलाओं की अगुवाई वाले किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के बनने से नई दिशा मिली। अब वे महुआ के फूलों से शराब बनाने की जगह उन्हें प्रोसेस करके पौष्टिक और उम्दा क्वालिटी के 'ट्राइबो महुआ लड्डू' बना रही हैं। जंगल से फूल बीनने वाली ये महिलाएं अब आत्मविश्वास से भरी उद्यमी बन गई हैं।

मध्य प्रदेश की बांधवगढ़ कृषि वनोपज प्रोड्यूसर कंपनी की पूनम तिवारी ने कहा, "सबसे बड़ा बदलाव यह है कि महिलाओं में नेतृत्व करने का आत्मविश्वास आया है। अब ज्यादा महिलाएं फैसले लेने में शामिल हो रही हैं, बाजार से जुड़ रही हैं और नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। कॉर्टेवा के सहयोग से हमारा संगठन मजबूत हुआ है और किसान समुदायों में हमारा असर बढ़ा है।"

भारत सरकार के लघु किसान कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी) के पूर्व प्रबंध निदेशक प्रवेश शर्मा ने कहा, "भारतीय खेती और ग्रामीण विकास में महिलाओं की भूमिका बहुत अहम है। महिलाओं को ज्ञान, हुनर और मौके मिलें तो उनकी रोजी-रोटी सुधर सकती है और ग्रामीण समुदाय मजबूत बन सकते हैं। #2MillionWomen जैसी साझेदारी वाली पहलें महिलाओं को खेती में हिस्सा लेने, नेतृत्व करने और खेती के भविष्य में योगदान देने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।"

समुन्नति फाइनेंशियल इंटरमीडिएशन एंड सर्विसेस प्रा. लि. के सहसंस्थापक श्रीधर ईश्वरन ने कहा कि भारतीय खेती के केंद्र में महिलाएं हैं। उनके मुताबिक ग्रामीण इलाकों में रोजी-रोटी के साधन मजबूत करने, अन्न सुरक्षा पक्की करने और समुदाय के विकास में उनकी भूमिका बेहद अहम है।

कॉर्टेवा एग्रीसाइंस के एशिया-पैसिफिक (एपीएसी) अध्यक्ष सुब्रतो गीड ने कहा, "भारतीय खेती की रीढ़ महिलाएं ही रही हैं। हमने कोशिश की है कि उनके योगदान को पहचान मिले और उन्हें जरूरी सहयोग मिले। गुजरे दो साल की उपलब्धियों पर हमें गर्व है, लेकिन हमारी प्रतिबद्धता बनी हुई है।" उन्होंने कहा कि लक्ष्य महिलाओं के लिए ज्यादा मौके बनाना और खेती की पूरी वैल्यू चेन में उनकी क्षमता को पूरी तरह विकसित होने में मदद करना है।

कंपनी के मुताबिक पहल अब अगले चरण में जा रही है। कॉर्टेवा महिलाओं की अगुवाई वाले संगठनों और उपक्रमों को सहयोग देना जारी रखेगा और खेती की पूरी वैल्यू चेन में ज्यादा महिलाओं को कामयाब होने के मौके दिलाने की कोशिश करता रहेगा।

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