मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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काटजू का दावा: पीस बॉन्ड पर सही करने से CJP नेताओं के लिए फिर आंदोलन करना मुश्किल

काटजू का दावा: पीस बॉन्ड पर सही करने से CJP नेताओं के लिए फिर आंदोलन करना मुश्किल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने कहा है कि पीस बॉन्ड पर दस्तखत करके कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने बड़ी गलती की है।

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने दावा किया है कि कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP की मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं। काटजू के मुताबिक पार्टी के नेताओं ने पीस बॉन्ड पर दस्तखत करके बड़ी गलती की है और इससे उनके आंदोलन के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है।

काटजू ने अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका के फैसले की भी कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा, "CJP अब खत्म हो चुकी है।"

एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में काटजू ने पीस बॉन्ड के मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखी। उनका कहना है कि बॉन्ड पर सही करने के बाद इन नेताओं के लिए दोबारा आंदोलन करना कानूनी तौर पर दिक्कत की बात हो सकती है। उन्होंने इस फैसले की तुलना ब्रिटिश राज के उन क्रांतिकारियों से की, जिनसे माफीनामा लिखवाया जाता था।

काटजू ने बताया कि पीस बॉन्ड पर दस्तखत करने का मतलब शांति बनाए रखने की गारंटी देना होता है। ऐसे में अगर नेता फिर से आंदोलन करें, तो बॉन्ड की शर्तें तोड़ने का सवाल उठ सकता है। उनका दावा है कि इस वजह से इन नेताओं को ज्यादा वक्त जेल में रहना पड़ सकता है।

इससे पहले सौरभ दास और आशुतोष रांका को करीब एक हफ्ते जेल में रहना पड़ा था। काटजू के मुताबिक आगे फिर आंदोलन हुआ तो कई महीनों की जेल की नौबत आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी डर से CJP के नेता आंदोलन से पीछे हट जाएंगे और संगठन की ताकत घट जाएगी।

काटजू का यह भी दावा है कि पीस बॉन्ड पर दस्तखत के फैसले से जनता के सामने CJP नेताओं की छवि बदल गई है। उनके मुताबिक ब्रिटिश दौर में माफीनामा देने वाले क्रांतिकारियों को लोग अलग नजर से देखने लगते थे। इसी तरह पीस बॉन्ड पर सही करने वाले नेताओं पर जनता का भरोसा कम हो सकता है।

काटजू ने आंदोलनों को लेकर एक और बात कही। उनका कहना है कि सिर्फ चेहरे बदलने से व्यवस्था की समस्याएं हल नहीं होतीं। पेपर लीक के मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी। काटजू ने साफ किया कि पेपर लीक की असल वजह भ्रष्टाचार है, इसलिए सिर्फ मंत्री को हटाने से मसला नहीं सुलझेगा।

ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग पर भी उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि एक आदमी की जगह दूसरे को बिठा देने से आम नागरिकों की जिंदगी कितनी बेहतर हो जाएगी।

काटजू का दावा है कि एक तरफ आंदोलन की भूमिका है और दूसरी तरफ पीस बॉन्ड से खड़ी हुई कानूनी अड़चनें, और संगठन इस दोहरी उलझन में फंस गया है। उनके इस बयान पर चर्चा हो रही है और सबकी नजर इस पर है कि CJP के नेता इसका क्या जवाब देते हैं।

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