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कारंजा में 13 हजार हेक्टेयर कपास पर मौसम की मार, एकड़ में डेढ़ क्विंटल तक की उम्मीद

कारंजा तालुका में कम बारिश, लंबे अंतराल और तेज धूप से कपास की पैदावार घटने का अंदाज़ा है।

कारंजा में 13 हजार हेक्टेयर कपास पर मौसम की मार, एकड़ में डेढ़ क्विंटल तक की उम्मीद तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

कारंजा तालुका के कपास उगाने वाले किसान इस बार बड़ी मुश्किल में हैं। इस साल खरीफ सीज़न में बारिश कम हुई, बीच में काफी दिन बारिश नहीं आई और उसके बाद धूप का तेज कहर रहा। किसान पहले ही इन हालात से परेशान थे, और अब कपास की फसल ने भी उन्हें निराश किया है।

बारिश की अनियमितता के बाद तापमान बढ़ा और मौसम फसल के खिलाफ रहा। इसका असर कपास की बढ़त और बोंड लगने पर पड़ा है। इसी वजह से पैदावार में बड़ी गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है।

कारंजा तालुका में कपास की बुवाई करीब 13 हजार 371 हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है। इस बार एकड़ में सिर्फ एक से डेढ़ क्विंटल पैदावार मिलने का अंदाज लगाया जा रहा है। किसानों के सामने गंभीर सवाल खड़ा है कि इतनी कम पैदावार से जुताई, खाद, कीटनाशक, छिड़काव, मजदूरी और कपास चुनाई का खर्च आखिर कैसे निकलेगा।

किसानों का कहना है कि सीज़न की शुरुआत से ही बारिश के मिजाज ने फसलों की बढ़त पर असर डाला। कुछ समय बारिश गायब रही तो जमीन की नमी घट गई। उसके बाद बढ़ते तापमान ने फसलों पर दबाव और बढ़ा दिया। कपास को जैसा अनुकूल मौसम चाहिए वैसा नहीं मिला, इसलिए पौधों की बढ़त, फूल लगने और बोंड के विकास पर असर पड़ा।

किसानों ने उम्मीद की थी कि कपास अच्छी होगी और साल भर का आर्थिक बोझ हल्का होगा। इसी उम्मीद में उन्होंने बीज, खाद, दवाओं और मजदूरी पर बड़ा खर्च किया। लेकिन अब खेत में खड़ी फसल से अपेक्षित आमदनी होगी या नहीं, इस पर अनिश्चितता बन गई है।

कुछ इलाकों में कपास की बढ़त संतोषजनक नहीं है और बोंड भी उम्मीद के मुताबिक नहीं लगे। इसलिए पैदावार घटने का डर जताया जा रहा है। नतीजा यह कि कपास बोने के बावजूद किसानों के हाथ आर्थिक नुकसान लगने की आशंका है।

कारंजा तालुका के कपास किसानों को उम्मीद है कि असल पैदावार के आधार पर नुकसान का आकलन होगा, फसल की हालत का मुआयना यानी जांच होगी और पात्रता के हिसाब से सरकारी मदद मिलेगी। किसानों की मांग है कि कृषि विभाग खेतों में जाकर हालात देखे और पैदावार का अंदाज तय करे।

पैदावार में बड़ी गिरावट होने पर किसानों को आर्थिक राहत देने के लिए सरकार को फसल की स्थिति पर गंभीरता से विचार करना होगा। नुकसान वाले क्षेत्र की ठोस जांच, लागू नियमों के हिसाब से मदद की प्रक्रिया और फसल बीमा योजना के तहत पात्र किसानों के दावों पर कार्रवाई की तरफ ध्यान देने की जरूरत है।

एक तरफ खेती की लागत बढ़ रही है, दूसरी तरफ मौसम के मिजाज की वजह से आमदनी की कोई गारंटी नहीं रही। ऐसे में कारंजा तालुका के करीब 13 हजार 371 हेक्टेयर की कपास फसल किसानों को कितना सहारा देगी, यही सवाल है। मेहनत, पैसा और वक्त लगाने के बाद भी उम्मीद के मुताबिक पैदावार न मिले तो खेती का हिसाब कैसे बैठाएं, यह बेबसी कपास किसानों में साफ दिख रही है।

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