कराड के मसूर में 14 करोड़ की योजना पूरी, फिर भी पानी को तरसते लोग; जगदाले की 15 दिन की चेतावनी
मसूर में जलजीवन मिशन की 14 करोड़ की पानी योजना पूरी हो चुकी है, पर घरों में पानी नहीं पहुंच रहा। पूर्व सभापति मानसिंगराव जगदाले ने प्रशासन को 15 दिन में समस्या हल करने को कहा है।
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कराड के मसूर गांव में जलजीवन मिशन के तहत करीब 14 करोड़ रुपये की पानी सप्लाई योजना पूरी हो गई है, लेकिन गांव वालों को अब भी पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। जिला परिषद की शिक्षा और वित्त समिति के पूर्व सभापति मानसिंगराव जगदाले ने पत्रकार परिषद में कहा कि प्रशासन ने पानी के सवाल को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।
जगदाले ने चेतावनी दी कि संबंधित प्रशासन ने 15 दिन में यह मसला नहीं सुलझाया तो महिलाओं का हंडा मोर्चा निकाला जाएगा। पत्रकार परिषद में सह्याद्री कारखाने के संचालक दिनकरराव शिरतोडे, महेश घाडगे, शिकंदर शेख और जमीर मुल्ला मौजूद थे।
जगदाले के मुताबिक यह योजना इसलिए हाथ में ली गई थी कि गांव की पानी की किल्लत खत्म हो और हर घर तक पूरा पानी पहुंचे। मगर योजना लागू होने के बाद भी लोगों की पानी की परेशानी में उम्मीद के मुताबिक सुधार नहीं हुआ, ऐसी शिकायत गांव वाले कर रहे हैं। सवाल यह है कि योजना का असली फायदा लोगों को कब मिलेगा। करोड़ों रुपये की योजना पूरी होने के बाद भी लोगों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
जगदाले ने बताया कि कई विवादों और अनिश्चितता में घिरी रही मसूर की यह 14 करोड़ की जलजीवन योजना आखिर पूरी हुई। बिजली कनेक्शन की अड़चन दूर हुई और पानी पूजन भी हो गया। लेकिन घरों में पानी पहुंचने के आखिरी चरण में फिर रोड़ा आ गया, और वह भी नल कनेक्शन का। नल कनेक्शन न होने से लोगों को पानी का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि नल जोड़ना किसकी अड़ियल भूमिका और मनमानी की वजह से अटका है। उनके शब्दों में, योजना गांव को मिली, पर सिर्फ नाम की, और मसूर वालों के नसीब में यह मजाक आया।
जगदाले ने पूछा कि क्या योजना शुरू करने में कोई राजनीतिक दबाव है, और अगर है तो वह झारी के शुक्राचार्य कौन है। उन्होंने कहा कि जल जीवन योजना छह महीने पहले ही पूरी हो चुकी है, फिर भी गांव वालों को पानी नहीं मिला। उनके मुताबिक यह मुद्दा राजनीतिक श्रेय लेने या कीचड़ उछालने का नहीं है। यह गांव वालों की पानी की जरूरत का है और उनकी सेहत और जीने से जुड़ा है। उन्होंने कहा, श्रेय कोई भी ले, पर पानी दीजिए। इस जलते सवाल का हल निकालने के लिए अलग से विशेष ग्रामसभा बुलाने की मांग को ठुकराया जा रहा है।
जगदाले ने यह भी कहा कि कई साल से एक्सपायर हो चुकी पुरानी पानी योजना के थोड़े से पानी पर मसूर वालों को दिन काटने पड़ रहे हैं। उन्हें 24 घंटे साफ पानी के सपने दिखाए गए। योजना पूरी हो गई, पर घर में पानी नहीं है। जगदाले ने साफ किया कि 14 करोड़ की यह योजना सिर्फ कागज काले करने के लिए थी या जनता की प्यास बुझाने के लिए, इसका जवाब प्रशासन को देना पड़ेगा।