कैट का अनुमान: नासिक सिंहस्थ कुंभ से महाराष्ट्र में 2 से 3 लाख करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के बालकृष्ण भरतिया ने नागपुर की बैठक में कहा कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए ग्रोथ इंजन बनेगा और व्यापारियों को अभी से तैयारी करनी होगी।
नासिक-त्र्यंबकेश्वर का सिंहस्थ कुंभ मेला सिर्फ आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था के लिए ग्रोथ इंजन भी बन सकता है। यह बात कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक बालकृष्ण भरतिया ने कही।
भरतिया टीम कैट नागपुर की तरफ से धर्म आधारित अर्थव्यवस्था पर रखी गई बैठक में बोल रहे थे। कैट का मानना है कि सरकार 35 से 40 हजार करोड़ रुपये का निवेश करके राज्य में कम से कम 2 से 3 लाख करोड़ रुपये के कारोबार को बढ़ाने की तरफ कदम बढ़ा चुकी है। कुंभ में 2 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
भरतिया के मुताबिक अब व्यापारियों को तैयार होना होगा, क्योंकि यह कारोबार उन्हीं के हिस्से आना है। स्थानीय और छोटे व्यापारियों को अभी से तैयारी शुरू करनी पड़ेगी, वरना इस मौके का फायदा कोई और उठा ले जाएगा।
उन्होंने कहा कि चंद्रगुप्त मौर्य के जमाने में मेले और तीर्थ ही भारत के व्यापार के केंद्र हुआ करते थे। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी कहा गया है कि तीर्थ, मेले और उत्सव योगक्षेम का आधार हैं। इसी पुराने आर्थिक मॉडल के सहारे आज के कुंभ का आर्थिक पहलू समझाने की कोशिश कैट और स्वदेशी व्यापारी मंच कर रहे हैं। इसके लिए वे नासिक और आसपास के इलाकों में दौरे करके वहां के व्यापारियों को इस आने वाले व्यापार के महोत्सव के बारे में बता रहे हैं।
देश और विदेश से श्रद्धालु आएंगे तो पैठनी, त्र्यंबक रुद्राक्ष, तांबे और पीतल के बर्तन और पूजा सामग्री बेचने वालों का कारोबार अच्छा चलेगा। भरतिया ने कहा कि एमएसएमई, होटल और परिवहन, सभी को इसका फायदा मिलेगा।
2 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने से होटल, ऑटो रिक्शा, तंबू और स्टॉल वालों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार बनेगा। स्थानीय युवाओं को सुरक्षा, स्वच्छता और डिजिटल सेवा में स्थायी रोजगार के एक लाख से ज्यादा मौके मिलेंगे।
भरतिया ने यह भी कहा कि नासिक की स्थानीय चीजों को दुनिया तक पहुंचाने का व्यापारियों के पास सुनहरा मौका है। लोकल को ग्लोबल बनाने के लिए कुंभ के जरिए नासिक के अंगूर, वाइन, पाव मिसाल और त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग को विश्व बाजार में ले जाया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे मौर्य काल में भारत के मसाले और मलमल दुनिया में पहुंचे थे।
भरतिया ने सरकार से मांग की कि कुंभ और उसके आसपास के इलाके में स्थानीय उत्पादकों के लिए वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट और वोकल फॉर लोकल के खास स्टॉल आरक्षित किए जाएं, ताकि कुंभ का फायदा बड़े कॉर्पोरेट को नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों को मिले।
बैठक में अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, महिला संयोजिका पूजा झाम, संरक्षक किशोर धाराशिवकर, राष्ट्रीय महिला सचिव आरती बादल, अश्विन गुप्ता, जया नगरारे और सचिव विरोध गुप्ता समेत बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद थे।
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