लद्दाख की 28 जगहें अब भारत के सरकारी नक्शे में, गोगरा और हॉट स्प्रिंग भी शामिल
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को लद्दाख की 28 सामरिक जगहों और भौगोलिक खासियतों को औपचारिक तौर पर भारत के आधिकारिक नक्शे में दिखा दिया है। इनमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बसे गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे अहम सरहदी इलाके भी हैं, जो विवादित माने जाते हैं। इससे पहले अरुणाचल प्रदेश की जगहों के साथ भी ऐसा ही किया गया था।
गृह मंत्रालय ने कहा है कि यह कदम लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन से सलाह-मशविरा करने के बाद उठाया गया है। मंत्रालय के मुताबिक इस फैसले का मकसद सरकारी नक्शे को सुव्यवस्थित करना, जगहों की सही पहचान आसान बनाना और इस संवेदनशील सरहदी इलाके के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।
इसी तरह का एक फैसला अगस्त में भी हुआ था। तब गृह मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और खासियतों का ऐलान किया था और उन्हीं जगहों का नक्शा जारी किया था। चीन ने उस फैसले पर एतराज जताया था।
गोगरा और हॉट स्प्रिंग प्रमुख सामरिक जगहों में गिने जाते हैं। 2020 में भारतीय और चीनी सेना के बीच हुए टकराव के दौरान यहां झड़प हुई थी। ये जगहें भारतीय गश्त के लिहाज से बहुत अहम हैं। 5 मई 2020 को पैंगोंग झील के इलाके में हुई हिंसक झड़प के बाद पूर्वी लद्दाख सरहद पर भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच तनाव बन गया था। दोनों तरफ से 2022 में सेना पीछे हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
नक्शे में शामिल की गई जगहों की सूची लंबी है। इसमें अलीशा गिरी (सबसे ऊंची चोटी), ब्रांगसा, चापचिगल दर्रा, कनिष्क शिखर, करुण पीर पर्वत, कुकसेल, मार्तंड गिरी, पारपिक ग्लेशियर, स्कामरी ग्लेशियर, शाचमिरिक दर्रा, श्कोरगा घाटी, जोरावर शिखर, देहरा कैंपस और द्वाक कार्यों के नाम हैं। इनके अलावा झोल्मोरी, कुमारयान पॉइंट, पांगलुंग, रिंचेन झांगपो, शाक्यश्री गिरी, गुरु रिपोचे, शामल लुंगपा, यांगपा नदी, मार्फ लोटसावा री, मिलारेपा कांग्री, शिवा री और महेश्वर री को भी आधिकारिक नक्शे पर चिन्हित किया गया है। शामल लुंगपा के बारे में बताया गया है कि 1950 के दशक में यह रास्ता गश्त और सेना की तैनाती के लिए इस्तेमाल होता था।
यह घटनाक्रम ऐसे वक्त हुआ है जब चीन अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख की जगहों को मंदारिन नाम देकर अपनी "नक्शे वाली आक्रामकता" बढ़ा रहा है, ताकि इन इलाकों पर अपना दावा और मजबूत कर सके। चीन का दावा है कि लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश तिब्बत का हिस्सा हैं और वह इन भारतीय इलाकों पर अपना हक जताता है। विश्लेषकों के मुताबिक चीन के जगहों के नाम बदलने के पीछे मुख्य मकसद इतिहास को दोबारा लिखना और उन इलाकों पर दावा मजबूत करना है, जिन्हें वह विवादित मानता है, भले ही वे असल में विवादित न हों।